गरुआ स्टेशन से १० किलोमीटर अंदर जंगल की तरफ एक पुरानी हवेली है। कई नौकर चाकर अब भी वहां है। गरूर सिंह के गुजरने के बाद अब कोई भी इस हवेली की देकरेख को नहीं बचा है। गरूर सिंह की पत्नी पहले ही गुजर चुकी है। उनका एकलौता बेटा और हवेली का वारिस यहाँ से कई हजार किलोमीटर दूर “लन्दन” में रहता है। दरअसल गरूर सिंह की बहन किसी ब्रितानी से प्यार कर बैठी थी और शादी के बाद लन्दन में ही सेटल हो चुकी है। सैम अपने बुआ के यहाँ ही बचपन से रहा है। वह भी अब ब्रितानी ही है। भारत से लगाव ना के बराबर है। सैम के गरुआ आने की वजह बस इस हवेली का बंदोबस्त करना है। या तो उसे पूरी तरह होटल में तब्दील कर दे या किसी और को हवेली बेच दे।
गरुआ स्टेशन पर राजधानी एक्सप्रेस अभी अभी आकर रुकी है। A.C के फर्स्ट क्लास डिब्बे से सैम बाहर आ रहा है। राम सिंह फूल माला के साथ स्टेशन पर उनका इंतज़ार कर रहा है। सैम के उतरते ही उसका फूल माला पहनाकर उसका स्वागत करता है। SUV गाड़ी स्टेशन के बाहर ही खड़ी है। सब हवेली के तरफ चल देते है। समय बीतने के साथ ही जंगल घना होता जा रहा है। सड़क की हालत अच्छी नहीं है। गाड़ी धीरे धीरे ही आगे बढ़ पा रही है। राम सिंह सैम से उनका हाल चाल पूछता है। थोड़ी देर दोनों पारिवारिक बातें करने में मशगूल रहते है। राम सिंह हवेली का सबसे पुराना वफादार है। उनके दादा, पिता जी भी हवेली में चाकरी कर चुके है। ये तीसरी पीढ़ी है जो अभी भी हवेली की सेवा में लगा है।
गाड़ी एक बड़ी सी कंपाउंड के अंदर आकर रुक चुकी है। सैम को राम सिंह अंदर ले जाता है। सामने के ही एक कमरे में उसे बिठाता है और नौकरों को चाय नाश्ता का आर्डर देकर काम में लग जाता है। पांच मिनट के अंदर ही चाय और सूखे फल लेकर “सुमनी” हाज़िर हो जाती है। चाय के बाद सैम कमरे से बाहर आता है हवेली में टहलने लगता है। तभी सुमनी फिर हाज़िर होती है और सैम को गाइड करने लगती है। हवेली दो मंजिला ईमारत है। बनावट काफी भव्य है। कई सारी पेंटिंग्स दीवारों पर टंगी है। १२ कमरे है यहाँ जो काफी साफ सुथरे नज़र आ रहे है। और ये सब सुमनी ही देखती है। सैम हवेली की छत पर खड़ा होकर जंगल की तरफ निहार रहा है। इस घने जंगल के बीच में कभी कभी ये बड़ी हवेली डरावनी भी लगती है। सैम थोड़े उधेरबुन में है क्या करे और कैसे करे। हवेली में अभी भी लगभग सात आठ नौकर काम करते है। लेकिन कई महीनो से इनको पगार नहीं मिली है। गरूर सिंह के गुजरने के बाद बुआ के कहने पर ही ये सब अभी तक यहाँ रुके हुए है। हवेली को कई ट्रेवल एजेंसी वालों को किराये पर दिया जाता है। लेकिन कम ही लोग यहाँ इस घने जंगल के बीच इस हवेली में आने का रिस्क लेते है। इस बार सैम हवेली को बेच देना चाहता है। कई पार्टियों से बात भी हो चुकी है। मामला फिर भी अटका पड़ा है। पर्यावरण से जुड़े लोग हवेली की खिलाफ आवाज़ भी उठा चुके है। सैम खुद में बुदबुदा रहा है, इस बार कुछ तो करना ही होगा। तभी सुमनी वापस से छत पर आती है। सैम के लिए खाना तैयार है।
खाना खाने के बाद सैम थोड़े आराम करने के विचार से पहले माले के किनारे वाले कमरे में बिस्तर पर लेट जाता है। कुछ ही समय गुजरा होगा कि किसी के चीखने कि आवाज़ आती है। सैम सहम सा जाता है। वो कमरे से बाहर निकालता है और आवाज़ कि दिशा में आगे बढ़ता है। पहले माले के दूसरे किनारे पर कमरा है, वही से आवाज़ आ रही है। गेट सटा हुआ है लेकिन खुला है। सैम अंदर दाखिल होता है। तभी सामने के बाथरूम का दरवाज़ा खुलता है और एक लड़की बाहर आती है। उसके पुरे शरीर पर साबुन का फेन लगा है, आँखे भी बंद है। उसने बस एक छोटा सा टॉवल लपेट रखा है। चिल्लाकर बोलती है “दीपक नल में पानी ख़त्म हो गया है, नीचे जाकर मोटर चालू करवाओ , जाने ट्रेवल एजेंसी वालों ने किस बात के पैसे लिए है?” सैम कोई उतर नहीं दे पाता है। बस हल्के से हाँ करके कमरे से बाहर निकल जाता है। तभी सुमनी वापस से प्रकट हो जाती है। स्थिति समझने के बाद सैम से फुसफुसा कर पूछती है “आपने ज्यादा कुछ देखा तो नहीं न “। सैम इंकार से सर हिलाता है। सुमनी ठहाके लगाते हुए सीढ़ियों से नीचे की तरफ चल देती है।
** इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है। उपरोक्त पिक्चर गूगल फोटो से ली गयी है, जो सिर्फ कहानी को दर्शाने के लिए है।
