ये कहानी है एक चूहे की. खुशमिजाज एवं अपने काम में काफी चुस्त दुरुस्त. अपने झुण्ड में सबसे बेहतर. उसकी किस्मत चमकी या बिग ब्रदर को उसका भोलापन पसंद आया. उसे चूहे के झुण्ड से निकालकर दूर शहर में ले जाकर शेर बना दिया गया.
चूहा भी अब खुद को शेर समझने लगा. लेकिन चूहा शेर के रोल में ये भूल गया कि उसे शेर की सिर्फ एक्टिंग ही करनी थी. बिग ब्रदर के लिए वो अभी भी चूहा ही था. लेकिन शेर की फितरत ही हर किसी के सामने गुर्राने की होती है और ये स्वाभाव अब चूहे को पसंद आने लगा था.
बिग ब्रदर चूहे की इस मानसिकता को भांप गया. चूहा जो शेर तो नहीं था लेकिन तथाकथित शेर हो चूका था, उसको सजा के तौर पर उसे फिर से उन्ही चूहों के बीच रख दिया गया. तथाकथित शेर तो कब का अपने झुण्ड से टूट चूका था. वो उनके साथ फिर से कभी जुड़ नहीं पाया. या ये कहें तथाकथित शेर अब ना तो शेर था और ना ही चूहा था.
पुनः मुश्को भवः यहाँ तक तो ठीक था. लेकिन अब उस झुण्ड में चूहे को रहने के लिए उसे साबित करना था कि वह भी यहीं का है, उन्ही का है, और सबके साथ रहना चाहता है. जो वो कर ना सका.
अब उस चूहे के पास दो ही रास्ते है. एक या तो हार मान ले और अपनी क़ुरबानी दे दे या दूसरा लड़ने को तैयार हो जाए. अब अपने हक़ के लिए उसे हर जगह लड़ना पड़ेगा क्योंकि वो अब ना तो चूहा है और ना ही शेर है.
अगर वो लड़ा और जी जान से लड़ा तभी वो जियेगा और खुद को एक पहचान दे पायेगा. अब ये पहचान सिर्फ उसकी होगी.
“चूहा” हमारे समाज के उस हर नौजवान का प्रतिनिधि है जो ऊर्जावान है, क्षमतावान है. लेकन ऊपर बैठे बिग ब्रदर बस यही चाहते है, वो उनके लिए काम तो करे लेकिन उनकी बराबरी ना करें.
हमारे नौजवानो की चूहे जैसी हालत ना हो, तो उसे संयमित और सुरक्षित रास्ता अपनाना होगा. जहाँ उसे अपनी जड़ो से भी जुड़कर रहना है और अपनी शाखाएं भी फैलानी है.
“आसमान में उड़ने वाले पक्षी को पता होता है, आसमान में बैठने की जगह नहीं होती”
