कविता

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लकीर के फकीर

आज सवेरे सर में दर्द बढ़ने के साथ हीं,  हाथो की लकीरों की ओर ध्यान गया,  रोजगार मिला नहीं, घर...

April 13, 2026
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तुम लौट आना।

जिंदगी यहीं है, तुम क्या ढूंढने निकले हो, सब यहीं है, सब सही है, तुम लौट आना। तुम क्या ढूंढने निकले हो, क्या मिला, खूद को ढूंढना है, सच...

April 13, 2026
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गंगा नहा आते है।

हमने सोचा कुछ पुण्य कमा आते है, चलो गंगा नहा आते है, सारे मैल यहाँ धुल जाएगा, गुनाह सारे यहाँ मिट जाएगा, भारी सा...

April 13, 2026
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मुसाफिर और मंजिल

 मै मुसाफिर चला था अपने राह पर, उम्मीदों का दामन था साथ में,  कुछ कर पाने की ऊर्जा थी हाथ में, ...

April 13, 2026
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वो और मै

वो और मै साथ साथ चल रहे थे साया था वो मेरा और मै उसका  सफर में हम दोनों थे हमजोली बनकर ...

April 13, 2026

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