कविता किताबें और हम Mukesh Prasad April 13, 2026 नन्हा हूँ मैं, बिलकुल कोरा हूँ मैं, ककहरा की किताबें लेकर आई है माँ, रंगबिरंगे तस्वीरों से भरी है किताबें, मेरा मन नहीं लगता है…
कविता पाठशाला से पहले की पाठशाला Mukesh Prasad April 13, 2026 अपने बचपन मे हूँ, खुद को निहार रहा हूँ, नन्हे पांव से एक बच्चा दुनिया नाप रहा है, गिरता है, खड़ा होकर फिर चलता है वो, सोचता…
कविता छुट्टियों के चार दिन Mukesh Prasad April 13, 2026 सरपट भाग रही थी जिंदगी,कुछ ऑफिस के भागमभाग में, कुछ घर के कामो में गुजर रही थी जिंदगी, मै एका ही था यहाँ सरकारी नौकरी…
कविता लकीर के फकीर Mukesh Prasad April 13, 2026 आज सवेरे सर में दर्द बढ़ने के साथ हीं, हाथो की लकीरों की ओर ध्यान गया, रोजगार मिला नहीं, घर परिवार बराबर चल रहा नहीं, …
कविता क्योंकि सच ही है सपनो तक पहुँचने का एक रास्ता. Mukesh Prasad April 13, 2026 सोचा था एक सपनों का जहाँ बनाऊंगा, लेकिन बनने से पहले ही सपना टूट गया, हकीकत फिर से सामने था, कुछ बेजान सा, रूठा हुआ…
कविता बैंको की छुट्टियां Mukesh Prasad April 13, 2026 सुबह सुबह मोबाइल में खबर आई है, बैंको में इस महीने है १५ दिन की छुट्टियां, निपटा ले अपना काम, नहीं तो होगी मुश्किल | मै…
कविता सच नहीं है ये, कि मै हारता नहीं | Mukesh Prasad April 13, 2026 लोग कहते है तू कभी हारता नहीं, हसीं तेरे चेहरे की कभी जाती नहीं, हम भी तो छुईमुई नहीं है, फिर भी मुरझा जाते है…
कविता तुम लौट आना। Mukesh Prasad April 13, 2026 जिंदगी यहीं है, तुम क्या ढूंढने निकले हो, सब यहीं है, सब सही है, तुम लौट आना। तुम क्या ढूंढने निकले हो, क्या मिला, खूद को ढूंढना है, सच को जानना है? हमने तुमने…
कविता गंगा नहा आते है। Mukesh Prasad April 13, 2026 हमने सोचा कुछ पुण्य कमा आते है, चलो गंगा नहा आते है, सारे मैल यहाँ धुल जाएगा, गुनाह सारे यहाँ मिट जाएगा, भारी सा मन हल्का हो जाएगा। हमने…
कविता मुसाफिर और मंजिल Mukesh Prasad April 13, 2026 मै मुसाफिर चला था अपने राह पर, उम्मीदों का दामन था साथ में, कुछ कर पाने की ऊर्जा थी हाथ में, लोगों ने कहा मान जा,…