माता दुर्गा के हाथो में कौन कौन से शस्त्र है ?

माँ दुर्गा को देवी, शक्ति, भगवती, माता रानी, जगदम्बा जैसे कई नामो से जाना जाता है। वह अंधकार व अज्ञानता रुपी राक्षसों से रक्षा करने वाली तथा कल्याणकारी हैं। दुर्गा का निरूपण सिंह पर सवार एक देवी के रूप में किया जाता है। दुर्गा देवी आठ भुजाओं से युक्त हैं जिन सभी में कोई न कोई शस्त्रास्त्र होते है।आइये आज जानते है, ये शस्त्र क्या है?

मान्यताओं के अनुसार, महिषासुर भगवान ब्रह्मा से शक्तियां और आशीर्वाद पाकर बहुत शक्तिशाली बन चूका था। वह खुद को अब सर्वशक्तिमान एवं अमर समझने लगा था।  महिषासुर ने देवों को युद्ध में परास्त कर दिया था। उसने इंद्रलोक भगवान इन्द्र से छीन लिया था। सारे देवगन त्रिदेव की शरण में गए, जहाँ ब्रह्मा, विष्णु, और महेश ने मिलकर माता दुर्गा को जन्म दिया। देवों ने उन्हें अपने शस्त्र भी दिए। 

त्रिशूल
देवी ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण किया हुआ है. कहा जाता है कि भगवान शिव ने मां अंबा को त्रिशूल भेंट किया था.

शक्ति दिव्यास्त्र
ये अस्त्र अग्नि देव ने माता को प्रदान किया था. महिषासुर समेत अनेक दैत्यों के साथ जब युद्ध करने आया, तब मां ने इसी अस्त्र से सभी को खदेड़ा था.

चक्र
रक्तबीज व अन्य कई दैत्यों को मारने के लिए मां ने चक्र का उपयोग किया था. भक्तों की रक्षा के लिए मां दुर्गा को ये चक्र श्रीहरि विष्णु ने दिया था.

शंख
धरती, आकाश व पाताल, तीनों लोकों को अपनी ध्वनि से कंपायमान कर देने वाला शंख जब ऊंचे स्वर में युद्ध भूमि में गूंजता था, तब सभी दैत्य डर के मारे भाग खड़े होते थे. वे डर से कांपने लगते थे. वरुण देव ने मां जगदम्बा को शंख भेंट किया था.

धनुष और बाण
युद्ध भूमि में माता ने धनुष और बाण से दैत्यों की सेना का विनाश किया था. धनुष और बाणों से भरे तरकश पवन देव ने प्रदान किए थे.

घंटा
अनेक असुरों और दैत्यों को घंटे के नाद से बेहोश कर उनका विनाश करने वाली मां को ऐरावत हाथी के गले से उतार कर एक घंटा इंद्र देव ने भेंट किया था. साथ ही अपने वज्र से एक और वज्र उत्पन्न कर मां को प्रदान किया था.

तलवार और फरसा
चंड-मुंड का विनाश करने के लिए माता ने काली का विकराल रूप धारण किया था. इस युद्ध को तलवार और फरसे से लड़ा गया था, जिन्हें काल द्वारा प्रदान किया गया था. 

आखिरकार, नौ दिन चले युद्ध में माँ दुर्गा ने महिषासुर एवं उसकी समस्त सेना का विनाश कर दिया। असत्य पर सत्य की विजय हुई। 

नवदुर्गा के नौ रूपों को भजन के माध्यम से जानें।

**साभार : News 18 एवं अन्य ऑनलाइन सोर्स

Oh hi there 👋
It’s nice to meet you.

Sign up to receive awesome content in your inbox, every month.

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.

Unknown's avatar

Mukesh Prasad

दोस्तों, मेरा नाम मुकेश प्रसाद है। पेशे से मै एक बैंकर हूँ। मेरी हिंदी लेखनी में हमेशा से रूचि रही है खासकर कहानी, कविता और निबंध लेखन में। मेरी कोशिश होती है मै अपनी लेखनी से एक अच्छा मनोरंजक विषय उपलब्ध करा सकू। अगर आपको मेरी ये लेखनी पसंद आयी हो तो आप इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करें।

You may also like...

Leave a Reply

Discover more from सतरंगी हिंदी

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading