रिया आज सुबह-सुबह जग कर तैयार हो चुकी थी. आज कॉलेज के दोस्तों के साथ गरुआ के किले को देखने जाने का प्लान है. रिया ने अपने बैग में पानी, लंचबॉक्स, कुछ फल और कुछ जरुरी सामान रखा और खुद भी तैयार होने लगी. थोड़ी ही देर में उसके दोस्तों की मंडली हाज़िर हो चुकी थी. सब के कंधो पर एक बैग था. जीप घर के बाहर सबका इंतज़ार कर रही थी.
एक घंटे की ड्राइविंग के बाद सब गरुआ के किले में पहुँच चुके थे. किले की मुख्य चारदीवारी के अंदर ही एक गेस्ट हाउस था जिसमे सबके रुकने की व्यवस्था थी. रिया गेस्ट हाउस के रिसेप्शनिस्ट के पास जाती है. रिसेप्शनिस्ट अपनी सीट पर खड़े होकर रिया को “गुड मॉर्निंग” कहती है. रिसेप्शनिस्ट रिया के पापा की अच्छी फ्रेंड है. दरअसल गरुआ के किले पर अंग्रेजी हुकूमत ने ताला जड़ दिया था. क्योंकि इसपर दावेदारी को लेकर कई राजाओ के बीच खुनी संघर्ष हुआ था.
तब से आज तक ये किला बंद ही रहा है. कुछ ही महीनो पहले रिया के पापा राकेश सिन्हा ने कोर्ट का आदेश पास कराकर किले का ताला खुलवाया था. धीरे-धीरे यहाँ टूरिस्ट आने लगे और ये किला गुलजार हो गया. किले की मरम्मत का काम भी लगभग पूरा हो चूका है। इसी क्रम में किले के मुख्य द्वार के भीतर एक गेस्ट हाउस एवं सिक्योरिटी कमरा बनाया गया है.
रिया और उसके दोस्त थोड़ी देर गेस्ट हाउस में रुकने के बाद गरुआ के किले को देखने निकल पड़ते है. गरुआ का किला पहाड़ी के ऊपर है एवं यहाँ से चढ़ाई शुरू हो चुकी है. यहाँ साल के अधिकांश दिन बारिश होती है. इसकारण से पहाड़ी के ऊपर प्रकृति ने करिश्मा कर रखा है. खूबसूरती कदम कदम पर बिखरी हुए है. फूलो की लताएं पेड़ो पर लिपटी है और कुछ खुशबूदार पेड़ भी है जो सुबह की सूरज की रौशनी के साथ मिलकर मदहोश खूबसूरती बिखेर रही है.
आधे घंटे की चढ़ाई संकरे रास्ते से पूरी हो चुकी है. गरुआ का किला अब सामने है. किले के द्वार को फूलों से सजाया गया है. सब अंदर दाखिल होते है. किले की दीवारों पर प्राचीन भारतीय शिल्प कृतियां उकेरी हुई है. किले की बनावट भी भारतीय शैली में है. ये सब किले के आकर्षण को बढ़ा रहे है. किले के अंदर कई कमरे है. कमरे एक दूसरे से संकरी गलियों से जुड़े है. राजा और रानी का कक्ष बाकी कमरों से ज्यादा बड़े है एवं भव्य है. रिया घूमते हुए एक सुन्दर से कमरे में दाखिल हुई. कमरा छोटा है किन्तु यहाँ हर चीज़ करीने से सजाकर रखी हुई है. साफ सफाई का भी खासा ध्यान रखा गया है. फर्श पर पुरानी कालीन बिछी है. सोफे भी लगे हुए है. ऐसा लगता है यह कमरा किसी खास मकसद से बनाया गया था. रिया ये सब देख कर हैरान हो जाती है. वह सोफे पर बैठ जाती है. सामने के दरवाजे से आ रही ठंढी एवं खुसबूदार हवा से रिया की पलके भारी होने लगती है. वह वहीं सो जाती है.
कई घंटे वो यूँ ही बेसुध होकर सोती रहती है. जब आंखे खुली तो देखा रात हो चुकी है. किले की दरवाजे और खिड़कियों को बंद किया जा चूका है. चारो तरफ अँधेरा है. बस सामने के बाहरी दरवाजे से हल्की-हल्की चांदनी रौशनी अंदर आ रही है. रिया दरवाजे के पास खड़ी हो जाती है. बाहर हल्की हल्की बारिश हो रही है जिससे मौसम ठंढा हो रहा है. रिया वापस से आकर सोफे पर लेट जाती है. अभी वो यहाँ से बाहर नहीं जा सकती. यहाँ रुकने के सिवा कोई और विकल्प नहीं है.
कुछ ही देर बाद अचानक से दरवाजे की खड़-खड़ाहट से उसकी आंखे खुल जाती है. दरवाजे के बाहर एक कपल है जो अंदर कमरे में आने की कोशिश कर रहा है. थोड़ी कोशिश के बाद दरवाजा खुल जाता है. रिया ये सब देख एक बड़े से अलमीरा के पीछे छिप जाती है. कपल आकर सोफे पर बैठ जाता है. ठंढी और खुसबूदार हवा दरवाजे से अंदर आ रही है. कपल भी रोमांटिक हो रहा है. हाथों में हाथ, बाँहों में बाहें डाले मिलन के लिए बेसब्र हुए जा रहे है. रिया अलमीरा के पीछे छिपकर ये सब देख रही थी.
अचानक से दरवाजे पर दस्तक होती है. तेज गुर्राने की आवाज आती है. ऐसा लगता है जैसे जंगली भेड़िया अंदर आया हो. कपल्स के चीखने चिल्लाने की आवांजे आती है. लेकिन भेड़िया दोनों को अपनी गिरफ्त में ले लेता है. उन्हें खींचता हुआ जंगल की तरफ ले जाता है. रिया डर से अलमीरा के पीछे छिपी कांप रही रही है. और थोड़ी देर में वो बेहोश होकर सो जाती है.
सूरज की रौशनी पहाड़ी पर आ चुकी है. रिया की आंखे खुलती है. वो उठकर दरवाजे से निकलकर बेतहाशा गेस्ट हाउस की तरफ भागती है. वहां पहुँच कर वो अपने दोस्तों को सारी घटना बताती है. सब घबरा जाते है. रिया सबके साथ उस कमरे तक वापस आती है. लेकिन उन्हें वहां कुछ नहीं मिलता है. कमरे की हालत एकदम नार्मल है. जैसे वहां कुछ हुआ ही ना हो.
सब रिया की तरफ देखते है और पूछते है, “यहाँ तो कुछ भी नहीं है?” हाँ एक बात उसके दोस्त नोटिस करते है की रिया के कपडे पर कुछ खून के धब्बे है. रिया कहती है, उसे नहीं मालूम ये खून के धब्बे उसके कपडे पर कैसे आये, वह तो घटना के समय दूर खड़ी थी. सारे लोग इस घटना को एक सपना करार देते है और उस दिन रिया का बहुत मजाक बनता है. लेकिन रिया ये मानने को तैयार नहीं है.
वह आज रात को फिर कमरे में रुकने का निर्णय लेती है.रात जैसे जैसे बढ़ रही है रिया की घबराहट भी बढ़ रही है. उसने अपनी ऑंखें खुली रखी है. वो आज बेहद चौकन्ना है. कुछ ही देर बाद वो होता है जो उसने कल देखा था. एक कपल मदहोश सा उस कमरे तक खींचा आता है. एवं सोफे पर बैठ कर एक दूसरे को प्यार करने लगता है. तभी भयानक गुर्राहट सुनाई देती है और लाल आँखों वाला भेड़िया कमरे के अंदर आता है. और कपल पर हमला कर देता है. दोनों कुछ ही सेकण्ड्स में ढेर हो जाते है. भेड़िया उनको अपने मजबूत जबड़े में पकड़कर खींचता हुआ जंगल की तरफ चल देता है.
रिया आलमीरा के पीछे से सब कुछ देख चुकी थी. वो अब एक पल वहां रुकना नहीं चाहती थी. लेकिन अभी बाहर निकलने का मतलब मौत था. वो चुपचाप वही पर छिपी रहती है. लेकिन थोड़ी ही देर में नींद उसे अपने आगोश में ले लेती है और रिया सो जाती है. रिया की जब आंखे खुलती है तब दिन का उजाला हो चूका है. कमरे में सब नार्मल है. कहीं कोई खून का निशान नहीं नहीं है. हाँ, रिया के कपडे पर कुछ खून के धब्बे जरूर है. रिया हैरान रह जाती है.
दो दिनों के टूर के बाद सब वापस लौट जाते है. रिया अपने पापा से सारी बातें शेयर करती है. पापा उसे घर पर रहकर आराम करने की सलाह देतें है. लेटे लेटे शाम ढल चुकी है. लेकिन रिया को हर पल वही घटना याद आ रही है. वो खिड़की के पास चुप चाप बैठी थी कि पापा घर वापस आ जाते है. पापा रिया को बतातें है की जंगल में दो कपल्स के कंकाल मिले है जिसे किसी जंगली भेड़िये ने मार खाया है. पापा को अब रिया की बातों पर थोड़ा यकीन होता है लेकिन जंगल की घटना का कोई कनेक्शन किले की घटना से मिलता नज़र नहीं आता है.
रात गहराती जा रही है. रिया आज अपने घर पर है. लेकिन उसकी घबराहट कम नहीं हो रही है. वो गार्डन के बीचोबीच वाले कमरे में है. पापा ने ही उसे ऐसा करने को कहा है. पापा एवं उसके दोस्त सैम जो एक्स आर्मी मैन है, सामने वाले घर से नजर रखे हुए है. उनके हाथों में बन्दुक है जो कभी भी गोलियां उगल सकती है.
तभी एक अनहोनी सा होता है. मुख्य द्वार टर्र की आवाज़ के साथ खुल जाता है. एक कपल्स जो मदहोश जैसा दिख रहा है वो घर के अंदर आ जाता है. वो गार्डन के बीचोबीच वाले कमरे में घुस जाता है. थोड़ी देर शांति रहती है लेकिन उसके बाद कमरे से चीखने एवं कराहने की आवाज़ें आती है. चंद सेकण्ड्स बाद ही एक खतरनाक लाल आँखों वाला भेड़िया दोनों को अपने जबड़े में खींचता हुआ गेट की तरफ बढ़ता है. लेकिन वो मुख्य द्वार से निकल पाता उससे पहले ही सैम की गोलियां उस खूंखार आदमखोर को छलनी कर देती है. वो आदमखोर ढेर हो चूका है.
सिन्हा ओर सैम छत से निचे उतरते है एवं भागते हुए गेट तक पहुंचते है. वहां का नज़ारा देखकर दोनों के होश उड़ जाते है. रिया खून से लथपथ जमीन पर पड़ी हुई है. कपल भी वही मरे पड़े है. सिन्हा सैम की तरफ देखते है, ऐसा कैसे हो सकता है? उनलोगो ने तो गोली भेड़िये के ऊपर चलाई थी तो गोली रिया को कैसे लगी ?
रात के साये को चीरता हुआ, पुलिस की गाड़ी रिया के घर के अंदर आती है. राकेश सिन्हा उनको सारी बात बताते है. लेकिन इंस्पेक्टर गुस्से में झापड़ लगाते हुए पूछता है, मुझे सच जानना है? तुम्हारी ये भेड़िये की स्टोरी मुझे डाइवर्ट नहीं कर सकती. सारी बॉडी पोस्टमॉर्टेम के लिए भेज दी जाती है. सिन्हा और सैम जेल में सलाखों के पीछे है. उन्हें रिया के क़त्ल के जुर्म में पुलिस ने पकड़ा है और अभी तहकीकात जारी है. वो रात किसी तरीके से कटती है . दोनों सो नहीं पाए है. बस एक दूसरे को आँखों हीं आँखों में ये सवाल पूछ रहे है, ऐसे कैसे हुआ ?
सुबह हो चुकी है. किले की गेस्ट हाउस की रिसेप्शनिस्ट भागी हुई थाने के अंदर आती है. पुलिस वाले उसे रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन वो तेज़ी से सिन्हा ओर सैम के सामने पहुँच जाती है. वो उनको बताती है कि गेस्टहाउस में आज फिर एक लड़की ने खतरनाक भेड़िये को किले में देखा है. सिन्हा ओर सैम को जोर का झटका लगता है. सिन्हा सैम से बोलते है, ये मैंने क्या कर डाला, मैंने किले को नहीं खुलवाया है ? मैंने तो सोये हुए भेड़िये को जगा दिया है ?
कोर्ट में अर्जी लगा दी गई है. किले कि घटनाओ को देखते हुए उसे फिर से बंद कर दिया जाये.लेकिन क्या इससे भेड़िया रुक जायेगा या फिर वो इंसानी रूप लेकर बदस्तूर कपल्स को अपना शिकार बनाता रहेगा.
** ये कहानी काल्पनिक है .
