गरुआ की पुरानी हवेली (अध्याय ५)

सुबह हो चुकी है, धुप भी निकल चूका है। दीपक उठ कर देखता है, करिश्मा बेड पर नहीं है। एक छोटा सा लेटर पड़ा है,  लिखा है, “लव पॉइंट पर इंतज़ार कर रही हूँ।” दीपक किमकर्तब्यविमूढ़ है। तभी डोर बेल बजता है और राम सिंह अंदर आते हैं। कहते है, “हमें क्षमा करे, हम आपके ट्रिप को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे। आपको आज ही हवेली खाली करनी होगी। आपकी ट्रिप का कैंसलेशन पेमेंट हम आपको वापस लौटा देंगे।

जल्दी करें, आपके पास चेक आउट के लिए सिर्फ दो घंटे है।” राम सिंह वापस चले जाते है। दीपक अब भी क्या करे और क्या न करे की स्थिति में है। अचानक से उठता है और अपना बैग पैक करने लगता है।  नीचे वो रिसेप्शन काउंटर पर जाता है लेकिन आज वहां कोई नहीं है। वो हवेली से बाहर निकल जाता है। 


लव पॉइंट बहुत ही खूबसूरत जगह है। जंगल के बीच में पहाड़ी और उसके तीन ओर नदी और एक तरफ से पहाड़ी के ऊपर जाने के लिए रास्ता है। पहाड़ी ढलानों पर पेड़ पौधे फूलों से लदे हैं। सुबह की ठंडी हवा और हल्की धुप मौसम को सुहाना बना रही हैं। रात को बारिश हुई थी उससे सड़क भीगी हुई है। करिश्मा पैदल ही पहाड़ी तक पहुँच चुकी है। पहाड़ी के ऊपर एक छोटा सा गार्डन है।

जिसमे मनमोहक फूल लगे है। पत्थर के कुछ स्लैब बैठने के लिए मौजूद है, करिश्मा एक स्लैब पर बैठ जाती है। वो अपने बैग से एक नोबेल निकालती है और पढ़ने लगती है। सैम भी अपना बैग पैक कर चूका है। खुश है कि उसका यहाँ आना सफल रहा। अब वो वापस लन्दन लौट सकता है। तभी उसे करिश्मा का ख्याल आया।  कल रात की पार्टी में वो नहीं आयी थी।

लेकिन आज करिश्मा ने उसे लव पॉइंट पर बुलाया था। “क्या मुझे वहां जाना चाहिए” उसने खुद से सवाल किया। अंदर से आवाज़ आयी ,”वो अपना जीवन साथी चुन चुकी है, तुम क्यों बीच में घुस रहे हो।” उसके दिमाग ने दिल को समझा लिया। हवेली में रामसिंह ओर अन्य स्टाफ को आखिरी प्रणाम बोला, और उनको भी हवेली खाली करने को बोलकर निकल पड़ा। 

करिश्मा लव पॉइंट पर इंतज़ार कर रही है अपने आने वाले कल का। सूरज धीरे धीरे सर पर आया और वापस से ढलान की तरफ है। दीपक को उसने अपने घरवालों के पसंद के खिलाफ चुना था। एक दूसरे के साथ काम करते करते दोनों ने एक दूसरे को पसंद कर लिया था। अब तो दीपक ही करिश्मा का सबकुछ था। करिश्मा की उम्मीद अब धीरे धीरे जबाब देने लगी थी।

फिर भी उसका दिल कर रहा था कि उसका प्यार जरूर आएगा। सूरज कि तिरछी किरणे भी अब पहाड़ी से गायब हो चुकी थी। गार्डन से हवेली तक जाने के लिए अब कोई ऑटो या टैक्सी नहीं थी। वह पैदल ही बुझे मन से हवेली कि तरफ चल देती है। सड़क के दोनों तरफ जंगल है जिससे बीच बीच में जंगली जानवरों की आवाज़े आ रही है। रास्ते पर भी कुछ लकड़बग्घे और सियार घूम रहे है।

करिश्मा अब डर रही है, लेकिन हवेली की तरफ बढे जा रही है। अँधेरे ने पूरा पांव पसार लिया है चारों तरफ। बीच बीच में जुगनुओं के टिमटिमाने से कुछ उजाला हो रहा है लेकिन वो काफी नहीं था। करिश्मा पसीने से नहा चुकी थी। लगातार एक घंटे चलने के बाद उसे हवेली के बाहर की रौशनी नज़र आने लगी है। अब वो और तेजी से चलने लगी है। वो जल्दी से जल्दी हवेली में पहुँच जाना चाहती है। 

करिश्मा हवेली के बाहर खड़ी है। खुले रहने वाले गेट पर अब ताला लगा है। हवेली के अंदर की लाइटें भी बंद हैं। चारों ओर सन्नाटा है। वह आवाज़ लगाती है “दीपक – दीपक”। कोई उत्तर नहीं मिलता है। वह सैम को भी पुकारती है। लेकिन अब भी चारों ओर सन्नाटा है।  अब वो हवेली के रक्षक राम सिंह को आवाज़ लगाती है। हवेली के अंदर से तो कोई आवाज़ नहीं आती है, लेकिन हवेली के सामने के जंगल में जानवरों की हलचल बढ़ जाती है। करिश्मा सर पकड़ कर हवेली के गेट के सामने बैठ जाती है।

क्या ये उसकी आखिरी रात है ? क्या वो आज जंगली जानवरों का निवाला बन जाएगी। हल्की हल्की बारिश भी शुरू हो चुकी है। करिश्मा ने अपना बैग सर पर रख लिया है। लेकिन वो कब तक खुद को बचा पायेगी। रात धीरे धीरे जंगल को अपने आगोश में ले रही है। लेकिन क्या करिश्मा की अगली सुबह होगी ?आज महीने से ज्यादा होने को है। आज शहर के सबसे रईश “दिलजीत सिंह” की शादी है।

बड़े बड़े लोग इसमें शामिल हुए हैं। दूल्हा दुल्हन स्टेज पर विराजमान है। दुल्हन काफी खूबसूरत है। इनकी जोड़ी शानदार लग रही है। कुछ पत्रकार स्टेज पर पहुँच चुके है। दुल्हन से सवाल करते है, “करिश्मा जी आपको दिलजीत पहली बार कहाँ मिले और आपको उन्होंने कब प्रोपोज़ किया।”

“हमारी पहली मुलाकात में दिलजीत हीरो बनकर आये थे। उस अँधेरी रात में दिलजीत ने ही मुझे बचाया था। भगवान् ने मेरे लिए ही दिलजीत को हवेली का नया मालिक बना कर भेजा था। बस वहीँ मै इन्हे अपना दिल दे बैठी।” करिश्मा ने जबाब देते हुए कहा। अब पत्रकार ने दिलजीत से पूछा “आपने करिश्मा जी को ही क्यों चुना ?””उस रात मैंने जंगल में एक शेरनी को देखा था।  बस एक शेर को और क्या चाहिए था।” दिलजीत ने जबाब दिया। 

पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।  और धीमी आवाज़ में एक गाना बजने लगा-

“जिंदगी कैसी है पहेली हाय ,

 कभी तो हसाये, कभी ये रुलाये,

 जिंदगी कैसी है पहेली……..

 ( कहानी समाप्त )

** इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है।  उपरोक्त पिक्चर गूगल फोटो से ली गयी है, जो सिर्फ कहानी को दर्शाने के लिए है।

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Mukesh Prasad

दोस्तों, मेरा नाम मुकेश प्रसाद है। पेशे से मै एक बैंकर हूँ। मेरी हिंदी लेखनी में हमेशा से रूचि रही है खासकर कहानी, कविता और निबंध लेखन में। मेरी कोशिश होती है मै अपनी लेखनी से एक अच्छा मनोरंजक विषय उपलब्ध करा सकू। अगर आपको मेरी ये लेखनी पसंद आयी हो तो आप इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करें।

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