रामनवमी

रामनवमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार भगवान राम के जन्म दिन के रूप में मनाया जाता है। हरेक साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि को यह उत्सव होता है। इस दिन भगवान राम की पूजा अर्चना के साथ साथ कई धार्मिक आयोजन किये जाते है। 

आइये, आज जानते है, हमारे सबसे प्रिय भगवान राम के बारे में –      

 1. भगवान राम के जन्म की कहानी     

2. भगवान राम का जीवन     

3. भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों हैं ?     

4. राम राज्य क्या है ?     

5. भगवान राम को समर्पित मंदिर     

6. रामनवमी का शुभ मुहूर्त – ३० मार्च

भगवान राम के जन्म की कहानी

त्रेता युग में लंकापति रावण का आतंक चारो ओर फ़ैल रहा था। मनुष्य त्राहिमाम कर रहे थे। देवतागण भी लंकापति से आतंकित थे। तब भगवान्  विष्णु ने धर्म की स्थापना के लिए अपना सातवां अवतार भगवान् राम के रूप में लिया।

राजा दशरथ अयोध्या के राजा थे। राजा की तीन रानियां थी, कौशल्या, शकुंतला, कैकेयी। कई सालो तक राजा दशरथ को कोई पुत्र नहीं हुआ। तब राजा ने पुत्र की कामना से गुरु वशिष्ठ से पुत्र कामेष्टि यज्ञ कराया। विशाल आयोजन किया गया। ऋषि, मुनियों, विद्वानों, को आमंत्रित किया गया। यज्ञ की समाप्ति के बाद सबको धन्य-धान, गौ देकर विदा किया गया। यज्ञ में मिले प्रसाद “खीर” को राजा दशरथ ने अपनी तीनो रानियों में बांट दिया। ईश्वर की कृपा से राजा को चार पुत्र हुए। माता कौशल्या ने राम को जन्म दिया, जो सबसे बड़े थे। शकुंतला से लक्षण और शत्रुघ्न एवं कैकेयी से भरत का जन्म हुआ। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के नवमी को राम का जन्म हुआ था। नील वर्ण का यह बालक तेज से भरा हुआ, हर दृष्टि को आकर्षित करने वाला था। 

भगवान राम का जीवन

भगवान राम की शिक्षा अपने तीनो भाइयों के साथ गुरु वशिष्ठ के आश्रम में हुई। वहीँ उन्होंने वेदों, उपनिषदों का ज्ञान प्राप्त किया। सबने वहां अच्छे ज्ञान के साथ साथ मानवीय एवं सामाजिक गुणों को भी सीखा। अस्त्र शस्त्र की शिक्षा भी उन्होंने ग्रहण किया। राम शुरू से ही दयालु, स्नेही, उदार और मानवीय भावनाओ के प्रति सवेदनशील थे। वे साहसी और निडर भी थे। वे कभी झूठ नहीं बोलते थे एवं हमेशा अपने गुरुओं का सम्मान करते थे। इन्ही गुणों के कारण वे लोकप्रिय होते गए। 

भगवान राम की पहली परीक्षा विश्वामित्र के साथ तपोवन जाने पर हुई। जहाँ पर सफलतापूर्वक उन्होंने उत्पाती असुरों और दानवों का संहार किया। विश्वामित्र के साथ ही वे मिथिला पहुंचे। जहाँ सीता का स्वयंवर था। मिथिला नरेश के पास भगवान शिव का एक धनुष था। जिसे उठा पाना ही बहुत मुश्किल था। उन्होंने सीता के स्वयंवर में यह शर्त राखी थी की जो ये धनुष उठाकर इसका प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वही सीता से विवाह कर पायेगा। स्वयंवर में मौजूद कोई भी इस धनुष को उठा नहीं पाया। लेकिन राम ने न केवल धनुष उठाया बल्कि इसका प्रत्यंचा भी चढ़ा दिया, लेकिन धनुष उसी वक़्त टूट गया। और इस प्रकार सीता का विवाह राम के साथ हो गया।

अब तक राम सबके प्रिय बन चुके थे। लेकिन मंथरा के गलत सलाह पर राम की छोटी माता कैकेयी ने राम के बदले अपने पुत्र भरत को अयोध्या का राजा बनवाने की ठान ली। राजा दशरथ को वो पुराने वचन याद दिलाये जो कभी युद्ध में मदद के लिए दशरथ ने कैकेयी से किये थे। इसमें उन्होंने राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास और अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राजसिहांसन मांग लिया। राजा दशरथ मजबूर थे। उन्हें राम को चौदह वर्ष के वनवास पर भेजना पड़ा।

वनवास के दौरान सीता का रावण के द्वारा हरण कर लिया गया। राम ने वानरी सेना बनाया जिसमे हनुमान जैसे राम भक्त भी शामिल थे। अपने तेज और पराक्रम के बल पर राम ने रावण को उसके लंका में मार गिराया। और सीता को सकुशल वापस ले आये। चौदह वर्ष के वनवास की समाप्ति पर राम अयोध्या लौटे और वहां के राजसिहांसन पर विराजमान हुए। 

राम के राज्य सम्हालने के साथ ही अयोध्या अब राम राज्य की तरफ तरत बढ़ रहा था। जहाँ हर और शांति और ख़ुशी थी। लेकिन इसीबीच कुछ गुप्तचरों ने यह सुचना दी की प्रजा के ही कुछ लोग सीता के चरित्र पर सवाल उठा रहे है। राम को प्रजा की ख़ुशी के लिए अपनी पत्नी सीता का त्याग करना पड़ा। सीता अब जंगल में भटकने को मजबूर थी। 

भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों हैं

मर्यादा पुरुषोत्तम संस्कृत का शब्द है मर्यादा का अर्थ होता है सम्मान और न्याय परायण, वहीं पुरुषोत्तम का अर्थ होता है सर्वोच्च व्यक्ति। जब ये दोनों शब्द जुड़ते हैं तब बनता है सम्मान में सर्वोच्च। श्रीराम जी ने कभी भी अपनी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया। उन्होंने सदैव अपने माता-पिता और गुरु की आज्ञा का पालन किया। साथ ही अपनी समस्त प्रजा का भी ख्याल रखा। वे न सिर्फ एक आदर्श पुत्र थे बल्कि आदर्श भाई, पति और राजा भी थे।भगवान राम का चरित्र पूर्णता समन्वयवादी है। उन्होंने अपने जीवन में कठिन संघर्ष किया इसके बाद भी वे विनम्र रहे और मुसीबतों को अवसर में बदलने का विशेष गुण उनमें सदा रहा।

भगवान राम के प्रमुख गुण- 

(१) सहनशील और धैर्यवान 

(२) दयालु स्वाभाव 

(३) हर जाति, हर वर्ग के साथ मित्रता 

(४) बेहतर नेतृत्व क्षमता 

(५) भाई के प्रति प्रेम 

राम राज्य क्या है ?

हिन्दू संस्कृति में राम द्वारा किया गया आदर्शासन रामराज्य के नाम से प्रसिद्ध है। वर्तमान समय में रामराज्य का प्रयोग सर्वोत्कृष्ट शासन या आदर्श शासन के प्रतीक के तौर पर किया जाता है। रामराज्य की छह प्रमुख विशेषताएँ हैं। इस काल में सभी सुखी है, सभी कर्तव्यपरायण हैं, सभी दीर्घायु है, सभी में दाम्पत्य प्रेम है, प्रकृति उदार है और सभी में नैतिक उत्कर्ष देखा जा सकता है।

भगवान राम को समर्पित मंदिर

यूँ तो भगवान राम को समर्पित मंदिर भारत के कोने कोने में है, लेकिन कई मंदिर का इसमें विशेष स्थान है। 

(१) राम राजा मंदिर, मध्य प्रदेश 

(२) कालाराम मंदिर, नासिक 

(३) अयोध्या राम मंदिर 

(४) रघुनाथ मंदिर, जम्मू 

(५) रामास्वामी मंदिर, तमिलनाडु 

(६) सीता रामचंद्र स्वामी मंदिर, तेलंगाना 

(७) त्रिपयार श्री राम मंदिर, केरल 

रामनवमी का शुभ मुहूर्त – ३० मार्च

पंचांग के अनुसार इस साल रामनवमी चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 29 मार्च 2023 को रात 09 बजकर 07 मिनट पर आरंभ हो रही है. नवमी तिथि की समाप्ति 30 मार्च 2023 को रात 11 बजकर 30 मिनट पर होगी.

इस दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है. मान्यता है कि राम नवमी पर भगवान राम की पूजा करने से यश और वैभव की प्राप्ति होती है. भगवान राम की आराधना करने से जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है.

**इस आर्टिकल के लिए सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध समाचारपत्रों से लिया गया है।  हम इसके लिए उनका आभार व्यक्त करते है।

Oh hi there 👋
It’s nice to meet you.

Sign up to receive awesome content in your inbox, every month.

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.

Unknown's avatar

Mukesh Prasad

दोस्तों, मेरा नाम मुकेश प्रसाद है। पेशे से मै एक बैंकर हूँ। मेरी हिंदी लेखनी में हमेशा से रूचि रही है खासकर कहानी, कविता और निबंध लेखन में। मेरी कोशिश होती है मै अपनी लेखनी से एक अच्छा मनोरंजक विषय उपलब्ध करा सकू। अगर आपको मेरी ये लेखनी पसंद आयी हो तो आप इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करें।

You may also like...

Leave a Reply

Discover more from सतरंगी हिंदी

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading