कोर्ट का फैसला

सुकरी रात में साये की तरह आगे बढ़ रही है। उसकी चाल तेज हो चुकी है। सड़क पर कोई ऑटो या टैक्सी नहीं थी और उसे हर हाल में स्टेशन पहुंचना था इसलिए वो पैदल ही निकल पड़ी थी। पटना के फॅमिली कोर्ट में कल उसका भविष्य तय होना है। उसने तलाक के बाद बच्चे को अपने पास रखने की अर्जी दी थी जबकि उसका पति रोहन बच्चे को सुकरी की ख़राब आर्थिक हालत और बच्चे के बेहतर पालन पोषण का हवाला देकर अपने पास रखना चाहता था। 

सुकरी और रोहन ने लव मैरिज की थी। दोनों का परिवार उनके इस फैसले के खिलाफ था इसलिए रोहन शादी के बाद सुकरी के साथ दोनों परिवारों से दूर पटना में सेटल हो गया था। अब रोहन के लिए सुकरी थी और सुकरी के लिए रोहन। सुकरी एक बुटीक के दुकान पर पर काम करने लगी थी जबकि रोहन ने एक प्राइवेट एकाउंटिंग फर्म में नौकरी कर लिया था। उनकी जिंदगी की गाडी चल पड़ी थी। 

रोहन सुकरी का पूरा ख्याल रखता था। सुकरी भी रोहन को हर तरीके से उसके फैसले में सपोर्ट करती थी। पटना के एक फ्लैट में सुकरी और रोहन के सपने पर फैला रहे थे। रोहन को इस महीने अपने ऑफिस से फेस्टिवल एडवांस मिला था। उसने ७ दिनों की छुट्टी की अर्जी भी दे दिया था। प्लान तैयार था सुकरी के साथ मसूरी जाने का।

सुकरी बुटीक में काम करते हुए एक काम और भी करती थी। उसने एक वीमेन वेलफेयर ग्रुप ज्वाइन कर लिया था। वह छुट्टी वाले दिन वीमेन वैलफेयर प्रोग्राम में शामिल होती थी। इस दौरान उसकी कई सामाजिक हस्तियों से निकटता हो गयी थी। अब तो वह इनकी पार्टियों में भी शरीक होने लगी थी। वह कभी कभार रोहन को भी अपने साथ ले आती थी।

शादी के एक साल के भीतर ही उसके घर में एक नन्हा मेहमान ने दस्तक दिया था। सुकरी ने एक बेटे को जन्म दिया था। उसका नाम रखा गया उज्जवल। अब सुकरी ने बुटीक का काम छोड़ दिया था। उज्जवल का ख्याल रखना ही उसकी जिम्मेदारी थी। रोहन भी उज्जवल को खूब प्यार करता था । ऑफिस की छट्टियों में उज्जवल के साथ पार्क में जाकर खेलना उसे खूब पसंद था। उज्जवल के लिए घर में एक नया नन्हा चेयर ख़रीदा गया था। उज्जवल जब उस पर बैठता था तो सुकरी उसे जूनियर रोहन कह कर बुलाती थी।

उज्जवल अब तीन साल का हो चूका था। पास के ही एक किड्स स्कूल में पढ़ने जाने लगा था। सुकरी अकेले घर में बोर नहीं होना चाहती थी और साथ में परिवार के खर्चे भी बढ़ रहे थे इसलिए उसने फिर से बुटीक ज्वाइन कर लिया। उधर रोहन ने अपने फर्म में मार्केटिंग का काम भी अपने जिम्मे ले लिया था ताकि उसकी इनकम बढ़ सके। लेकिन इस इनकम के चक्कर में उज्जवल अब कही पीछे छूट चूका था।

अब परिवार की गाडी डगमगाने लगी थी। उज्जवल लम्बे समय से बीमार चल रहा था। डॉक्टर के चक्कर लगाते हुए खर्चे बहुत बढ़ गए थे। सुकरी बुटीक में अब एक्स्ट्रा काम भी लेने लगी थी। लेकिन इस समय उज्जवल को सुकरी के प्यार की ज्यादा जरुरत थी। रोहन उज्जवल के बीमारी के कारण कभी कभी रात रात भर सो नहीं पाता था। इसकारण वो ऑफिस में अच्छा काम नहीं कर पा रहा था। वह अब चिड़चिड़ा होने लगा था। सुकरी भी उज्जवल और रोहन को कब तक संभाल पाती।  उसकी हालत भी धीरे धीरे बिगड़ने लगी। 

कुछ तो था जो सुकरी और रोहन दोनों मिस कर रहे थे, उनका अपना परिवार। सुकरी के मम्मी-पापा, भाई-बहन,और भी रिश्तेदार और इसी तरह रोहन का भी। सुकरी थोड़े दिनों के लिए अपने मम्मी पापा के पास वापस जाना चाहती थी। और रोहन भी अपने परिवार के पास जाना चाहता था। ये फैसला दोनों के लिए कितना सही था, दोनों को नहीं मालूम था। 

छुटियों में दोनों अपने परिवार के पास लौट चुके थे। अब कई महीने गुजर चुके है लेकिन ना ही सुकरी और ना ही रोहन पटना के फ्लैट में वापस आये है। सुकरी रात के अँधेरे में भागते हुए स्टेशन पहुँच चुकी है। पटना के लिए ट्रेन टाइम पर है। चार घंटे के सफर के बाद सुकरी पटना मे है। फॅमिली कोर्ट १० बजे की है। सुकरी और रोहन आमने सामने की टेबल पर बैठे है। लेकिन दोनों चुपचाप हैं। जो कभी एक दूसरे के हमसाये थे, आज सामने होकर भी गुमशुम है। उज्जवल भी पास में है लेकिन वह नहीं समझ पा रहा है, क्या हो रहा है ? 

सुकरी खुद को ज्यादा देर रोक नहीं पाई। वह रोहन के पास जाकर उससे लिपट गयी और फफक कर रोने लगी। रोहन भी अपने जज्बात छुपा नहीं पाया और सुकरी को बाँहों में भींच लिया। उज्जवल भी दोनों से लिपट चूका था। आसुओं का सैलाब था तीनो की आँखों में। अभी तो तीनो में प्यार था लेकिन आगे के लिए कोर्ट के फैसले का इंतज़ार था  ……

** इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है।  उपरोक्त पिक्चर गूगल फोटो से ली गयी है, जो सिर्फ कहानी को दर्शाने के लिए है।

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