चमकीले कपडे और सर पर टोपी लगाया है,
दो असली और दो नकली पैरो पर आया है,
अचरज और कोतुहल सबके चेहरे पर छाया है,
शेरों को इंसानो ने कब का मार खाया है,
ये इंसान हीं है तभी बचकर यहाँ तक आ पाया है .
कभी हरा था जंगल, जीवन से भरा था जंगल,
लेकिन इंसानी विकास की चाहत ने सब जला डाला है,
खदान, फैक्ट्रियां, और ऊँची इमारतों को फैलाया है,
अब जल, वायु, ध्वनि प्रदुषण से जंगल कहाँ बच पाया है,
शेर और उसकी प्रजा अब कहीं नजर नहीं आया है .
आज जंगल मिटा है, जंगल वाले मिटे है,
अब दूर नहीं, अगली इंसानों की बारी है,
ये कैसा अँधा विकास है, जिसने सब जला डाला है,
सोच और तकनीक बदलने की घडी अब सामने आई है,
प्रकृति को साथ लेकर “सतत विकास” ही समझदारी है .
**सतत विकास वह विकास है जो भविष्य की पीढ़ियों की अपनी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान की जरूरतों को पूरा करता है।
