गरुआ की पुरानी हवेली (अध्याय ४)

करिश्मा और दीपक सोफे पर बैठकर बातें कर रहे है। कल दोनों लव पॉइंट जाने की प्लानिंग कर रहे है। करिश्मा सैम को भी कल के लिए आमंत्रित कर चुकी है। और वह सुबह आठ बजे ही जाना चाहती है। डिस्कशन चल ही रहा था कि दरवाजे पर दस्तक होती है और “सुमनी” अंदर आती है। वो गरमागरम सूप लेकर आई है। सामने के सोफे पर बैठकर वो मसालों को सूप में मिक्स करने लगती है। 

करिश्मा की तरफ देखकर बोलती है “सैम भैया मालिक के बिगड़ैल बेटे है, उनका स्वाभाव भी अच्छा नहीं है।  और वो गुस्सा भी जल्दी हो जाते है।” करिश्मा सुमनी को बीच में ही टोकती है और कहती है “ऐसा तो बिल्कूल नहीं है, मुझे तो वो नेकदिल और मिलनसार लड़का लगा, वो बातें भी अच्छी करता है, स्मार्ट भी है, उसका सेंस ऑफ़ ह्यूमर भी अच्छा है।” करिश्मा बोले ही जा रही थी। 

शायद आज सैम का जादू उसपर चल गया था। सुमनी सवाल करती है, क्या सैम भैया आपको पसंद है ? करिश्मा सुमनी के इस सवाल का जबाब नहीं दे पाती है। सुमनी सूप टेबल पर ही छोड़ कर निकल जाती है। दीपक को बहुत ही बुरा लग रहा है। सूप का एक एक घूँट उसके गले में अटक रहा है। वह करिश्मा की तरफ देखता है , करिश्मा शांत बैठी सूप पी रही है।  दीपक उठ कर खिड़की के पास आ जाता है। बाहर की तरफ देखता है चारों ओर सन्नाटा है। हवेली के बाहर की लाइट्स जल रही है। अब हलकी हलकी बारिश भी शुरू हो चुकी है। हवा भी ठंडी है।  कुल मिलकर मौसम बहुत ही रोमांटिक है।

दीपक ने आज तक करिश्मा पर पूरा भरोसा किया है। वह सुमनी के द्वारा छोड़े गए सवाल को दिमाग से निकाल देना चाहता है। वापस जाकर करिश्मा के बगल में सोफे पर बैठ जाता है। करिश्मा से नजरें मिलाकर कहता है, “आज मौसम बहुत ही सुहाना है।” करिश्मा उसकी तरफ तिरछी नज़रो से देखती है और पूछती है “अब अपने इरादे भी जाहिर कर दीजिये जनाब।” दीपक करिश्मा को बस अपनी बाँहों में भर लेना चाहता है। अचानक से किसी गाड़ी के हॉर्न बजाते हुए हवेली में घुसने की आवाज़ आती है।

करिश्मा सोफे से उठती है और कमरे से निकल जाती है। दीपक दरवाजे को देखता ही रह जाता है।करिश्मा ने जब से जंगल में छिपे “अमरपुरा” के बारे में जाना था उसका इस हवेली में इंटरेस्ट बढ़ गया था। वह सैम से मिलकर हवेली की सेल डील की जानकारी लेना चाहती थी। वह सैम के कमरे में दरवाजा बिना नॉक किये ही अंदर आ जाती है। सैम शायद आने के बाद कपडे ही बदल रहा था।

वह सिर्फ टॉवल में है। वह अचानक से करिश्मा को देखकर हैरान हो जाता है। करिश्मा कमरे में लगे सोफे पर बैठ जाती है। और बोलती है “सैम तुम तो टॉवल में बहुत हैंडसम लग रहे हो, काफी अच्छा डेवलप किया है तुमने अपनी बॉडी को। आज मौसम भी सुहाना है क्या ख्याल है तुम्हारा ? सैम करिश्मा की तरफ देखते हुए उसे पढ़ने की कोशिश करता है। करिश्मा जोर से हसने लगती है। और कहती है, “डोंट वोर्री, मै तुम्हारा चिर हरण नहीं करुँगी।

मै बस इतना जानना चाहती हूँ कि आज हवेली की डील का क्या हुआ? “हवेली कि सेल पक्की हो गयी है, मैंने आज सारे पेपर पर हस्ताक्षर कर दिया है।” सैम ने जबाब देते हुए कहा। करिश्मा ने सैम को बधाई दी और कल लव पॉइंट पर आने को आमंत्रित भी किया, और बोली “आप अपनी गाड़ी में आ सकते है।।” ये बोलकर वो वापस अपने कमरे में आ जाती है।  देखती है दीपक कमरे में नहीं है। वह दीपक को आवाज़ भी लगाती है लेकिन कोई उत्तर नहीं मिलता है।

करिश्मा थोड़ा फ्रेश होकर बिस्तर पर बैठ जाती है। और एक नोबेल निकाल कर पढ़ने लगती है। तभी दीपक कमरे में आता है और सोफे पर बैठ जाता है। वह करिश्मा से सवाल करता है, “क्या चल रहा है यहाँ ? आखिर तुम्हे सपनो का राजकुमार मिल ही गया?” 

“व्हाट नानसेंस , बस कुछ भी बोलना है। प्लीज मैचुर कि तरह बिहेव करो”।  तभी दरवाजे का डोरबेल बज उठता है , सुमनी अंदर आती है और करिश्मा से कहती है, “सैम भैया एक छोटी सी पार्टी दे रहे है, आप दोनों को वही खाने पर बुलाया है।” इतना कहकर वो वापस चली जाती है। इस निमंत्रण ने दीपक को ओर भड़का दिया। वो कुछ देर पहले ही करिश्मा और दीपक कि बाते छुपकर सुनकर आया था। वह गुर्राते हुए करिश्मा से कहता है,”मैंने अपने और तुम्हारे बीच कभी किसी को आने नहीं दिया। अपने घर वालों को भी नहीं। तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी करिश्मा।”

दीपक तुम्हे क्या हो गया है? क्या तुम्हे मुझपर भरोसा नहीं है? शादी से पहले ही मै तुम्हारे साथ इस ट्रिप पर आ गई, क्या ये काफी नहीं है ?

ये तू-तू मै-मै का सिलसिला एक घंटे से ज्यादा तक चलता ही रहता है। दीपक करिश्मा पर सवालों की बौछार कर रहा है।  करिश्मा शांति से जबाब दे रही है। लेकिन दीपक का हर अविश्वास करिश्मा को छलनी कर रहा है और करिश्मा कि शांति दीपक को अशांत कर रही है। 

नीचे ग्राउंड हॉल में पार्टी शुरू हो चुकी है। आज हवेली के सारे लोग यहाँ एकत्रित हुए है। सैम सभी का खाने की टेबल पर स्वागत करता है। और कहता है, “गरुआ कि हवेली हमारे पूर्वजो की शान हुआ करती थी। कभी वो दिन थे जब इस इलाके में हवेली का आदेश ही सबकुछ था। हमारे परदादा और आपकी पुरानी पीढ़ियों ने इसे मिलकर बनाया था। इस हवेली में आकर हमें अजीब सी ख़ुशी मिलती है, जो मै बयां नहीं कर सकता।

लेकिन मुझे ये कहते हुए दुःख हो रहा है कि आज मैंने हवेली को बेंच दिया है। नए मालिक इसे होटल में तब्दील करेंगे। इस हवेली में ये हमारी आखिरी शाम है, लेकिन ख़ुशी इस बात है कि शायद हवेली के बुरे दिन अब ख़त्म हो जायेंगे। खैर इन बातों को छोड़ते है और आखिरी जश्न को हमलोग मिलकर एन्जॉय करते है। राम सिंह अपनी कमान सम्हाल लेते है , वो अपने हर स्टाफ को आज खुश करना चाहते है। हर कि टेबल पर उनकी पसंद का खाना परोसा जा रहा है।  शराब भी साथ में सर्व कि जा रही है। 

इधर कमरे में करिश्मा सिसकियाँ लेते हुए भूखे ही सो चुकी है। दीपक कि आँखों में आज नींद नहीं है। नीचे बज रहे संगीत के नगाड़े उसके दिल को चोट कर रहे है। लेकिन जंगल की गहरी रात धीरे धीरे सबको अपने आगोश में ले लेती है।

** इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है।  उपरोक्त पिक्चर गूगल फोटो से ली गयी है, जो सिर्फ कहानी को दर्शाने के लिए है।

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