आपकी सोच ही आपका रास्ता तय करती है और अपनी सोच को सकारात्मक दिशा देना बहुत ही महत्वपूर्ण है | हमारी सकारात्मक सोच हमें अपने रास्ते पर डटे रहना, लगातार कोशिश करते रहना और कभी ना हार मानना सिखाती है |
विवेकानन्द की ये पंक्तियाँ “जागो, उठो, और चलते रहो जब तक लक्ष्य हासिल न हो जाये” बिलकुल ही सार्थक है | हम अपने मंजिल और लक्ष्य को तभी पा सकते है जब हम उसके लिए मेहनत करेंगे, कोशिश करेंगे | लेकिन क्या कोई एक बार में अपने लक्ष्य को पा लेता है | इसका जबाब नहीं है | बहुत कम ही विरले होते है जिन्हे पहली कोशिश में ही लक्ष्य मिल जाता है | तो क्या एक बार असफल होने पर हमें हार मान लेनी चाहिए | बिलकुल नहीं | हार का मतलब हार नहीं होता, यह जीत के लिए बढ़ाया गया पहला कदम भी हो सकता है | हार ही जीत की बुनियाद होती है |
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत | इसका साफ मतलब है एक योद्धा तब तक नहीं हारता जब तक वह खुद अपनी हार स्वीकार नहीं कर ले | सवाल ये है कि हम अपनी हार को जीत में कैसे बदल सकते है | जबाब है सकारात्मकता से | मान लीजिये आप एक योद्धा है | आप ने अपनी पहली लड़ाई के लिए बहुत तैयारी की, लेकिन आप हार गए | अब आप क्या करेंगे |
क्या आप इसे अपनी हार मान लेंगे | जैसे ही आप इसे अपनी हार मानेंगे , आप अवसादों में घिर जाएंगे और ऐसा होने पर आप अपनी जिंदगी से भी हार सकते है | तो हमें क्या करना चाहिए | आपको दूसरी लड़ाई की तैयारी करनी होगी | पहले कि गलतियों को दूर करना होगा | खुद को अंदर से मजबूत करना होगा | आप अपनी हार को भूलकर नई लड़ाई के लिए तैयार हो जाएँ | यही आपकी सकारात्मकता है |
सकारात्मकता हमारे जीवन में बहुत महत्व रखता है –
१. आपको सही पथ पर अग्रसारित करता है | लक्ष्य से भटकाव को रोकता है |
२. सकारात्मकता कभी आपको हारने नहीं देता है, वो आपकी जीत की बुनियाद भी होता है |
३. आप कभी हारते है तो आपको वापस से उठने की शक्ति देता है |
४. आपको कार्यो की निष्पादन के लिए प्रेरित करता है | आपको खुद पर भरोसा करना और आने वाला समय अच्छा होगा, ये उम्मीद जगाता है|
सकारात्मकता और अवसाद दो विपरीत मनोस्थितियाँ है | सकारात्मकता आपको आगे बढ़ने और लक्ष्य को पाने के लिए प्रेरित करता है | लेकिन जब आप हार मान लेते है और अगली जीत के लिए आप खुद को तैयार नहीं कर पाते है तो अवसाद आपके मस्तिष्क में जगह बना लेता है |
अवसाद आपको खुद से, आपके लक्ष्य से , समाज से दूर ले जाता है | आप गलत फैसले लेने लग जाते है | आपके लक्ष्य और कार्यो में तालमेल नहीं रह जाता है | आगे चलकर ये रुकाव कि स्थिति पैदा कर देता है | आप कुछ भी कर पाने कि स्थिति में नहीं रहते | आपने जल्द ही अवसाद को दूर नहीं किया तो आप अपनी जिंदगी से भी हार सकते है |
आप अवसाद को अपने पास तो बिलकुल नहीं रखना चाहेंगे | लेकिन चाहे अनचाहे ये आप से चिपक चूका है तो आप इसे कैसे दूर करेंगे |जबाब है सकारात्मकता से | आपको खुद पर भरोसा करना सीखना होगा | खुद में ये सोच बनानी होगी कि आपसे बेहतर इस कार्य को कोई और नहीं कर सकता और एक न एक दिन आप इसे साबित करेंगे | आप जिस दिन से ऐसा करने लगेंगे आपका भटकाव रुक जायेगा | आप एक सही दिशा में कार्य कर पांएंगे और आप लक्ष्य भी पा लेंगे |
अब हम उपरोक्त बातों को एक कहानी कि माध्यम से समझते है –
जीवन एक लड़का है जिसने अभी अभी कॉलेज में दाखिला लिया है | वह खुशमिजाज है | वह पढाई में भी अच्छा है | खेल और सामाजिक कार्यो में भी उसकी रूचि है | पहले साल के वार्षिक परीक्षा में जीवन अच्छा अंक लाना चाहता है | लेकिन परीक्षा से कुछ दिन पहले वो बीमार हो जाता है | लम्बे दिन तक वह डॉक्टर और अस्पताल के चक्कर लगाता है | एक महीने बाद वो ठीक हो पाता है | परीक्षा सर पर है , वह इसकी तैयारी में लग जाता है | लेकिन पहला वार्षिक परीक्षा में वो अच्छा नहीं कर पाता है |
घरवाले और उसके दोस्त उससे उसके रिजल्ट के बारे में पूछते है | वो इसे बताने में लज्जित महसूस करता है | उसे खुद में ऐसा लगने लगता है कि वो अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पायेगा | वो अपने परिवार को क्या जबाब देगा | उनकी उम्मीद तो मुझसे है और मै यहाँ कुछ नहीं कर पा रहा हूँ | वो डरने लग जाता है खुद को सुरक्षित करना चाहता है | और धीरे धीरे आपने दोस्तों से कटने लग जाता है | अब वो खेल में भी पहले जैसा नहीं रह गया है | सामाजिक कार्यो में भी उसकी रूचि घट गई है | जीवन अब खुद में ही उलझा रहता है | अब सोते जागते वो बस अपने पिछले परीक्षा के परिणाम के बारे में सोचता रहता है | लक्ष्य तो अब दूर कि कौड़ी लग रहा है | ये अवसाद कि स्थिति है |
जीवन कि स्थिति देख उसके पिता उसे अपने पास बुलाते है | उसे सकारात्मकता के बारे में बताते है | पहले के जीवन और अभी के जीवन में फर्क को समझाते है | सच को स्वीकारना है कि आप अच्छा नहीं कर पाए है लेकिन एक सच ये भी है कि आप अच्छा कर सकते है | खुद पर विश्वास करना और आने वाले समय से अच्छी उम्मीद करना बताते है |
जीवन कुछ दिनों कि कोशिशों के बाद वापस से उठ खड़ा होता है | पुरानी बातो को भूलकर परिवार और दोस्तों से मिलता है | खेल और सामाजिक कार्यो में वो फिर से रूचि लेने लगा है | इस बार वो वार्षिक परीक्षा से कई महीने पहले इसकी तैयारी में लग जाता है | दूसरे साल के परीक्षा में वो सबसे आगे है | उसकी मेहनत ने रंग दिखाया है | सकारात्मकता ने उसे फिर से जिंदगी से जोड़ दिया है | आज जीवन वापस से खुशमिजाज बन चूका है ।
ये सच है, सकारात्मकता आपके लक्ष्य को आपके करीब ला देता है, जिसे आप आसानी से हासिल कर सकते है | इसके होते हुए अवसाद नहीं पनप सकता है | और दूसरे शब्दों में कहे तो “सकारात्मकता आपको जीवन देता है |”
