वो और मै
वो और मै साथ साथ चल रहे थे
साया था वो मेरा और मै उसका
सफर में हम दोनों थे हमजोली बनकर
गाड़ी में रफ़्तार भी थी और जिंदगी भी।
वक्त ने करवट बदली है, आज हम जुदा है
ना रास्ते मिल रहे है ना साथ मिल रहा है
सफर तो जारी है पर सब खाली खाली है
जिंदगी तो अब बस ठहरा हुआ पानी है।
कब और कैसे अब मिलेंगे दो साये
समय और रास्ते तू कुछ तो कर
हाथो में लकीरे तो उसने साथ में बुना था
तू ऊपर वाले से मेरी फरियाद तो कर।
सपनो से निकल कर खुद को जगा रहा हूँ
हकीकत से खुद को मिलवा रहा हूँ
बागवान हूँ मै, नीयत है साफ मेरी
साये से वादा है, बहारें लौट कर आएँगी।