रक्षाबंधन हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है, जो श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है . इस साल यह त्यौहार 9 अगस्त शनिवार को मनाया जायेगा . पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त को दोपहर 2:12 बजे से शुरू होकर 9 अगस्त को दोपहर 1:24 बजे तक रहेगा .
रक्षाबंधन का त्यौहार हरेक साल श्रावण महीने के पूर्णिमा को मनाया जाता है . यह त्यौहार भाई बहन का होता है . इस दिन बहने भाई के कलाई पर राखी बांधती है और मिठाई खिलाती है .
रक्षाबंधन में राखी का बहुत महत्व है . सामान्यतः यह कच्चे सूत से बना होता है . लेकिन अब रेशमी धागे, रंगीन कलावे, सोने- चांदी से बने राखी भी चलन में है .
रक्षाबंधन में बहाने भाई की कलाई पर राखी बांधने के साथ ही भगवान् से अपने भाई की तररकी एवं लम्बी उम्र की कामना करती है . भाई भी अपनी बहन को आजीवन सुरक्षित रखने का वादा करता है .
पौराणिक कथा के अनुसार दानवीर बलि ने युद्ध में देवताओं को हराकर स्वर्ग पर कब्ज़ा कर लिया . तब विष्णु भगवान् ब्राह्मण का वेश धारण कर राजा बलि के यहाँ भिक्षा मांगने पहुंच गए . राजा बलि ने ब्राह्मण को वचन दिया, जो भी मांगेंगे वो उन्हें देंगे . ब्राह्मण ने राजा से तीन पग भूमि माँगा . राजा बलि ने हां कर दिया .
भगवान् विष्णु तब वामन अवतार में प्रकट हुए एवं दो ही पग में आकाश पातळ और पृथ्वी को माप दिया, फिर राजा बलि से पूछा, अब तीसरा पग कहाँ रखु .तब विष्णु भक्त बलि ने भगवान् से कहा आप तीसरा पैर मेरे सर पर रख लीजिये .
भगवान् ने फिर राजा बलि को रसातल का राजा बना दिया एवं उसे अजर अमर रहने का वरदान दिया. राजा बलि ने भी अपने तप से भगवान को खुश कर दिया एवं वरदान में दिन और रात उनके सम्मुख रहने का वचन ले लिया . भगवान विष्णु यह वचन देकर फंस गए .
अब वो लक्ष्मी जी पास वापस नहीं जा पा रहे थे . इस बात से माता लक्ष्मी चिंतित रहने लगी . तब नारद जी ने लक्ष्मी जी को एक उपाय सुझाया . लक्ष्मी जी ने राजा बलि को राखी बाँध कर भाई बना लिया और अपने पति को अपने साथ ले आई . उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी . तभी से रक्षा बंधन का ये त्यौहार मनाया जाता है .
आज भी रक्षा बंधन में राखी बांधते वक्त या किसी मंगल कार्य में मौली बांधते वक्त यह श्लोक बोला जाता है:-
- ‘येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।*
- तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे माचल-माचल:।।’*
अर्थात् जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बली को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधता-बांधती हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा। हे रक्षे! (रक्षासूत्र) तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो या आप अपने वचन से कभी विचलित न होना।
- सदैव प्रसन्न रहिए I*
- जो प्राप्त है, पर्याप्त है I I*
