सोनू साव के राशन की दुकान पर आज उमड़ी थी भीड़,
सामने के चौमंजिला मॉल मालिक के दिल में चुभा था तीर,
मौसम पूजा का था, हर तरफ खरीदारी का था जोर,
सोनू साव ने सजाई थी दुकान, मन हर्षित था नाच रहे थे मोर .
लड़के लड़कियां सज कर आते है, चौमंजिला मॉल में घुस जाते है,
सुन्दर सुन्दर फोटो खिचवाते है, फेसबुक पोस्ट अपडेट हो जाता है,
मंहगे सामान के साथ लाइक्स और कमैंट्स भी खूब मिलता है,
नए दौर के प्रजातान्त्रिक शॉपिंग का अब यही मंत्रा है .
चुनाव की आजादी है यहाँ, विकल्प भी खूब मिलता है,
ऑफर की है भरमार यहाँ, टूरिज्म का मजा भी मिलता है,
मोल करने का कोई झोल नहीं है, सब फिक्स्ड रेट चलता है,
बच्चे, जवान, बूढ़े, सबका दिल यहाँ के लिए मचलता है .
सोनू साव थे खाली खाली, अब मॉल देख उनका मन जलता है,
दाम रखे है मैंने कम, फिर भी बोहनी पर शंका है,
कुछ कर जाऊंगा ऐसा, भीड़ उमड़ेगी मेरी दुकान पर,
हर तरफ चर्चा होगी, सोनू साव की क़ुरबानी का .
आज दिवाली पर सोनू साव की दुकान पर सब फ्री है,
भीड़ उमड़ी है यहाँ, मॉल मालिक के दिल में चुभा तीर है,
एक प्रजातंत्र यहाँ दूसरे प्रजातंत्र से बेहाल है,
हाय मेरे देश में अब हर सोनू साव फटेहाल है .
**यहाँ सोनू साव से हमारा मतलब भारत में स्थापित दुकानदारी से है. हमारा किसी जाति खास के मन को ठेस पहुँचाना उद्देश्य नहीं है.
