गरुआ की पुरानी हवेली (अध्याय २)
सुन्दरम ट्रेवल एजेंसी में करिश्मा दीपक का इंतज़ार कर रही है. फ़ोन पर अभी अभी बात हुई है, वो अभी रास्ते में है. टेबल के सामने बैठे एजेंसी के मालिक “सलमान” ने करिश्मा से पूछा, “आपने इस जगह को क्यों चुना? ये खूबसूरत हवेली है लेकिन यहाँ कम ही लोग जाते है.””मुझे थोड़ा एडवेंचर पसंद है. घने जंगल के बीच हवेली. और आप कह रहे है, जाने के लिए सड़क भी है. वहां पहुंचने के बाद किसी चीज़ की कमी नहीं है. सर्वेंट भी हैं. तो फिर हमारे लिए इससे अच्छी जगह कोई और हो ही नहीं सकती.” करिश्मा जबाब में कहती है.
सलमान करिश्मा की तारीफ करते हुए बोलते है, “आप आज के ज़माने की लड़की है. जिसके लिए डर जैसी कोई चीज़ नहीं होती. किस तारीख को आपकी बुकिंग कर दूँ.””बस इसी सब के लिए दीपक का इंतज़ार कर रही हूँ. वो एक बार आ जाये तो सब फाइनल कर लेते हैं.” करिश्मा कहती है. सलमान करिश्मा के लिए कोफ्फी और स्नैक्स आर्डर करते है और कुछ और कस्टमर के साथ व्यस्त हो जाते हैं.
करिश्मा और दीपक शहर के ही एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते है. दोनों की मुलाकात एक दोस्त की पार्टी में हुई थी. पहले दोस्ती हुई फिर प्यार. अब दोनों एक दूसरे पर जान छिड़कते हैं. जल्द ही शादी भी करने वाले है. करिश्मा ने सबसे छुपकर ही ये टूर वाला प्लान बनाया है. अचानक से कमरे का दरवाजा खुलता है और दीपक अंदर आता है.
करिश्मा उसे देखकर खुश होकर डेस्टिनेशन की फोटो उसके हाथ में थमा देती है और अनुरोध करते हुए कहती है, हमें इसी शनिवार को निकलना है. दीपक कुछ देर सोचता है फिर हामी भर देता है. आगे का प्लान करिश्मा सलमान से मिलकर तैयार कर लेती है.
शनिवार की सुबह ही दीपक और करिश्मा डेस्टिनेशन के लिए रवाना हो जाते हैं. राजधानी एक्सप्रेस के A.C. फर्स्ट क्लास में ज्यादा भीड़ नहीं है. आमने सामने की सीट पर दोनों बैठे है. करिश्मा खुश है. शादी से पहले वो दीपक को पूरी तरह जान लेना चाहती थी. उसे कुछ वक्त चाहिए था जहाँ वो दीपक के साथ अकेले हो. बातों बातों में रास्ता कैसे कट गया पता ही नहीं चला. ट्रैन गरुआ स्टेशन पहुँच चुकी है .
थोड़ी देर स्टेशन पर रुकने के बाद दोनों बाहर निकले. वहीं टैक्सी मिल गया. दीपक टैक्सी वाले से “हवेली चलना है ” कहकर टैक्सी में सामान भरने लगा. टैक्सी वाले ने एकबार के लिए पलटकर दोनों को देखा. फिर बिना कुछ बोले अंदर आने का इशारा करता है. टैक्सी हवेली की तरफ चल पड़ती है. करिश्मा और दीपक अपने एक दोस्त की शादी की बाते करने लगते है.
थोड़ी देर बाद करिश्मा टैक्सी वाले से पूछती है, ,”आप हवेली क्यों नहीं जाना चाहते थे? टैक्सी वाला सामने देखते हुए हल्की मुस्कान देते हुए कहता है, ऐसी कोई बात नहीं है, बस सड़क अच्छी नहीं है और रास्ता भी सुनसान है. जंगली जानवर भी कभी कभार सड़क पर आ जाते है.”
हवेली सामने ही है. जंगल के बीच इंसान की इकलौती निशानी. राम सिंह गेट पर उनका स्वागत करता है. नौकरों को उनका सामान पहले माले के किनारे वाले कमरे तक पहुंचाने के लिए कहता है. करिश्मा राम सिंह से बातों में घूमने के समय के बारे में पूछती है. राम सिंह कहते है, मैडम आप फ़िक्र ना करे आपका यहाँ पूरा ख्याल रखा जायेगा. दीपक और करिश्मा कमरे में आ जाते है.
करिश्मा बिस्तर पर लुढ़क जाती है. लेकिन दीपक थोड़ा सुस्त नज़र आ रहा है. तभी दरवाजे का डोरबेल बजता है, और सुमनी धड़धड़ाते हुए अंदर घुस जाती है. “मै सुमनी, किसी चीज़ की जरुरत हो तो आवाज़ लगाइएगा, तुरंत हाज़िर हो जाउंगी.”करिश्मा हॅसते हुए कहती है, “वो तो आपके आने के अंदाज़ से ही हमें पता लग गया.” फिर दीपक के लिए मेडिसिन लाने को कहती है. “मैडम क्लिनिक यहाँ से दूर के गाँव में है, साहब को वहां खुद ही जाना होगा.”
यह कहकर सुमनी वहां से निकल जाती है. थोड़ी देर बाद फिर से डोरबेल बजता है, करिश्मा देखती है सामने राम सिंह खड़े हैं. कहते है, “चलिए दीपक जी आपको क्लिनिक तक लेकर चलते है. दोनों साथ में गाडी में बैठकर वहां से निकल जाते है.
रात होने को है, दीपक लगभग दो घंटे बाद अभी वापस आया है. उसके हाथ में दवाइयों का एक बड़ा पैकेट है. करिश्मा दीपक से पूछती है, “डॉक्टर ने क्या कहा?””फ़ूड पोइज़निंग हो गयी है, शायद रास्ते में खाने में कुछ गड़बड़ हो गयी, एक दिन दवाई लेने एवं जरुरी से आराम करने को कहा है. शायद हमें एकाध दिन हवेली में ही बैठकर गुजारना होगा.”करिश्मा दीपक का हाथ पकड़ती है और कहती है, “फ़िक्र मत करो, जल्दी ठीक हो जाओगे, मै हूँ ना.”
** इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है। उपरोक्त पिक्चर गूगल फोटो से ली गयी है, जो सिर्फ कहानी को दर्शाने के लिए है।