एक नयी पहल – एक देश एक चुनाव

एक देश एक चुनाव

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में शनिवार को “एक देश एक चुनाव” (One nation one election) के लिए गठित उच्चाधिकार समिति की पहली बैठक बुलाई गयी. इसमें गृह मंत्री अमित शाह, विधि मंत्री अर्जुन राम, गुलाब नवी आज़ाद, येन.के. सिंह, सुभाष कश्यप एवं संजय कोठरी शामिल हुए. 

इस बैठक में लोकसभा, राज्यों की विधान सभाओं, नगरपालिकाओं, एवं पंचायत के लिए एक ही दिन पुरे देश में चुनाव कराये जाने पर चर्चा हुई. यह समिति एक देश एक चुनाव के विभिन्न पहलुओं को जांचेगी एवं संविधान और सम्बंधित कानूनों में बदलाव के लिए सुझाव देगी.

एतिहासिक तथ्य

देश में १९६७ तक लोकसभा,राज्य के विधानसभाओ के लिए एक दिन चुनाव कराये जाते थे. लेकिन उसके बाद ये सिलसिला टूट गया. लोकसभा एवं विधानसभाओं के लिए पृथक रूप से चुनाव कराये जाने लगे. हालाँकि १९८३ में चुनाव आयोग ने भारत में एक साथ चुनाव कराने की वकालत की. इसके बाद गठित कई समितियों ने भी एक देश एक चुनाव का सुझाव दिया.

एक देश एक चुनाव से सम्बंधित समितियां

1. विधि आयोग रिपोर्ट (१९९९)

न्यायधीश बी पि जीवन रेड्डी की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने हर साल, हर मौसम में चुनाव कराये जाने पर आपत्ति जताई थी एवं कहा था की हमें वापस मुड़ कर देखना होगा, जब पुरे देश में एक साथ चुनाव होते थे. हरेक पांच साल में लोकसभा एवं विधानसभाओं के लिए एक चुनाव हो.

2.  संसदीय स्थाई समिति (२०१५)

डॉ. इ.एम्.सुदर्शना नचिप्पन की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने अपनी रिपोर्ट “Feasibility of holding simultaneous election to House of people (Loksabha) and state legislative assemblies” १७ दिसंबर २०१५ को प्रस्तुत किया.  जिसमे एक साथ चुनाव कराये जाने के कई फायदे बताये गए थे.

१. अलग अलग चुनावों में होने वाले बेतहाशा खर्चे से बचा जा सकेगा.

२. आदर्श आचार संहिता के लागु होने से नीतियों के लागु होने में देरी से बचा जा सकेगा.

३. जरुरी सामानों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी.

४. चुनावी प्रक्रिया के कारण जनशक्ति पर निरर्थक दबाब को कम किया जा सकेगा.

3. विधि आयोग ड्राफ्ट रिपोर्ट (२०१८)

न्यायधीश बी.यस.चौहान की अध्यक्षता वाली इस समिति ने पुरे देश में एक साथ चुनाव कराये जाने के लिए विभिन्न संवैधानिक एवं विधि कानूनों की समीक्षा की. एवं यह स्पष्ट किया कि संविधान एवं सम्बंधित कानूनों (Representation of people act 1951, Rules of procedure of loksabha and state assemblies) में संशोधन की जरुरत है. समिति ने यह भी कहा कि इन संशोधनों को ५०% राज्यों की विधानसभाओ से अनुमोदित करना होगा.

एक साथ चुनाव के इस समिति ने कई फायदे बताये.

१. सरकारी पैसों की बचत 

२. सुरक्षा बलों पर दबाब में कमी.

३. सरकारी नियमो को लागु करने में सुगमता.

४. प्रशासनिक इकाइयां विकास कार्यों में ध्यान लगा सकेगी.

एक देश एक चुनाव प्रक्रिया अपनाने वाले देश

दुनिया में अभी ऐसे तीन देश है जो एक देश एक चुनाव जैसे मिलते जुलते व्यवस्था अपना रहे है. इनमे बेल्जियम, स्वीडन, दक्षिण अफ्रीका शामिल है. लेकिन उपरोक्त सभी देशों कि चयन प्रक्रिया अलग है. इन देशो का आकार और जनसँख्या भी भारत के मुकाबले कम है. 

अपने पड़ोस में स्थित नेपाल भी २०१७ में नए संविधान के तहत पुरे देश में विभिन्न इकाइयों के लिए एक साथ चुनाव करा चूका है. लेकिन ये चुनाव दो तिथियों में कराये गए थे. 

भारत एक देश एक चुनाव अपनाने वाला चौथा देश होगा. 

एक देश एक चुनाव प्रक्रिया में समस्याएं

१. एक साथ चुनाव कराये जाने के लिए बड़ी संख्या में चुनाव कर्मियों की जरुरत.

२. EVM एवं VVPAT मशीनो की बड़ी संख्या में जरुरत.

३. अगर कोई राज्य सरकार समय से पहले गिर जाती है, और विधान सभा भंग हो जाती है या कर दी जाती है तो क्या होगा. 

निष्कर्ष

हमारे देश के लिए “एक देश एक चुनाव” नया नहीं है. लेकिन राजनितिक जोड़ तोड़ के इस माहौल में इसे अमल में लाना एक दुस्कर कार्य है. इसके लिए राजनीतक दलों में बेहतर तालमेल एवं जनता को इसके लिए जागरूक करने की जरुरत है. सरकारी मशीनरी को विकास मशीनरी में बदलने का यह एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. 

**इस आर्टिकल की सामग्री इंडिया टुडे से लिया गया है. हम इसके लिए उनका आभार व्यक्त करते है.

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Mukesh Prasad

दोस्तों, मेरा नाम मुकेश प्रसाद है। पेशे से मै एक बैंकर हूँ। मेरी हिंदी लेखनी में हमेशा से रूचि रही है खासकर कहानी, कविता और निबंध लेखन में। मेरी कोशिश होती है मै अपनी लेखनी से एक अच्छा मनोरंजक विषय उपलब्ध करा सकू। अगर आपको मेरी ये लेखनी पसंद आयी हो तो आप इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करें।

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