गरुआ की पुरानी हवेली (अध्याय ३)
सड़क के दोनों किनारों पर बड़े बड़े पेड़ है जो सड़क के ऊपर छतरी की तरह फैले हुए हैं। सुबह...
सड़क के दोनों किनारों पर बड़े बड़े पेड़ है जो सड़क के ऊपर छतरी की तरह फैले हुए हैं। सुबह...
सुन्दरम ट्रेवल एजेंसी में करिश्मा दीपक का इंतज़ार कर रही है. फ़ोन पर अभी अभी बात हुई है, वो अभी...
सुबह की चाय की प्याली हाथ में है, रविवार की छुट्टी की खुमारी साथ में है, कई दिनों के काम की...
अपने बचपन मे हूँ, खुद को निहार रहा हूँ, नन्हे पांव से एक बच्चा दुनिया नाप रहा है, गिरता है, खड़ा होकर...
सरपट भाग रही थी जिंदगी,कुछ ऑफिस के भागमभाग में, कुछ घर के कामो में गुजर रही थी जिंदगी, मै एका...