रविवार की छुट्टी

सुबह की चाय की प्याली हाथ में है,

रविवार की छुट्टी की खुमारी साथ में है, 

कई दिनों के काम की भरपाई आज कर लेनी है,

बिस्तर वापस बुला रहा है, सपनो में ही मुलाकात कर लेनी है।

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Mukesh Prasad

दोस्तों, मेरा नाम मुकेश प्रसाद है। पेशे से मै एक बैंकर हूँ। मेरी हिंदी लेखनी में हमेशा से रूचि रही है खासकर कहानी, कविता और निबंध लेखन में। मेरी कोशिश होती है मै अपनी लेखनी से एक अच्छा मनोरंजक विषय उपलब्ध करा सकू। अगर आपको मेरी ये लेखनी पसंद आयी हो तो आप इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करें।

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