बहुत पुरानी बात है. सुंदरगढ के जंगलों के बीच एक गाँव था. गाँव में “हरिया” किसान रहता था. हरिया खेती बाड़ी के अलावा बकरियां भी पाला करता था. उसके बकरियों के झुंड में एक मेमना था “केसरी”. केसरी बहुत ही नटखट और चंचल था. वो कभी भी शांति से बैठता नहीं था. वह हमेशा कोई न कोई शैतानी किया करता था. उसके इन हरकतों के कारण कई बार झुण्ड को परेशान होना पड़ता था. लेकिन एक खासियत भी थी उसकी, वो काफी समझदार था. अंत में झुण्ड को किसी ना किसी तरीके से मुसीबत से उबार लेता था.
एक दिन केसरी के दिमाग में एक ख्याल आया, क्यों न आज जंगल घूम के आया जाये. वो चुपके से निकल पड़ा जंगल की और. जंगल के किनारे बहुत सारी घास उगी हुई थी, जो बिलकुल हरी हरी थी. खाने में घास काफी स्वादिष्ट था. केसरी घास खाने लग गया. घास खाकर पेट तो भर गया, पर केसरी का मन नहीं भरा. उसने सोचा जब जंगल के किनारे इतनी अच्छी घास है तो जंगल के अंदर तो और भी हरी हरी और स्वादिष्ट घास होगी. चल पड़ा वो जंगल के अंदर.
केसरी घास खाने में मशगूल था. तभी उसे कुछ आहट सुनाई दी. उसने सर उठा कर देखा, सामने से एक शेर उसी की तरफ चला आ रहा था. शेर को देखते ही केसरी की सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी. आज तो वो इस शेर का निवाला बन जायेगा. तभी उसकी नज़र सामने पड़े एक बड़ी सी हड्डी पर गई. उसने झट से उसे उठा लिया. वह उसे चाटने और खाने की एक्टिंग करने लग गया. खाते हुए उसने जोर से डकार लिया.
ऊँचे आवाज़ में उसने कहा “आज तो शेर का ताजा मांस खाकर मज़ा आ गया, लेकिन पेट नहीं भरा. कुछ और शेर का मांस मिलता तो मजा आ जाता. शेर झाड़ियों में झुपकर ये सब देख रहा था. उसने कभी शेर खाने वाला ऐसा जानवर नहीं देखा था. शेर उसकी बात सुनकर डर गया. वो बिना रुके वहां से निकल गया.
शेर के जाने के बाद केसरी की जान में जान आयी. वो बिना वक़्त गवाए जंगल से निकल जाना चाहता था. लेकिन उसने हरी हरी घास के चक्कर में रास्ते की ओर ध्यान ही नहीं दिया था. उसने किसी एक दिशा में जाने का निश्चय किया. वह लगभग आधे घंटे चल चूका था लेकिन उसे जंगल का किनारा नज़र नहीं आ रहा था. तभी उसकी नज़र सामने से आते एक सियार पर पड़ी.
केसरी ने सोचा सियार से पूछकर देखते हैं, इसे तो जंगल का रास्ता पता होगा ही. सियार के पास आते ही, उसने सियार को सलाम किया. उसने पूछा सियार भाई कैसे हो? मै तो ठीक हूँ लेकिन तुम बताओ इस घने जंगल में क्या कर रहे हो? सियार ने जबाब में पूंछा. केसरी ने कहा मै तो अपने मालिक के साथ आया हूँ, लेकिन उन्हें घर से लकड़ी कटाई का कुछ औज़ार चाहिए था. इसलिए मै घर वापस आरी लाने जा रहा हूँ. गाँव जाने का रास्ता किस तरफ से है मुझे बताएँगे. सियार, केसरी की बात सुनकर घबरा गया, उसने झट से इशारे से गाँव जाने का रास्ता केसरी को बता दिया. केसरी धन्यवाद बोलकर उस ओर चल पड़ा.
सियार केसरी की बात सुनकर उसे हाथ भी नहीं लगा पाया था. लेकिन बकरी के बच्चे के मांस का स्वाद सोच सोचकर उसके मुंह में पानी आ रहा था. उसे एक उपाय सुझा. वह भागता हुआ शेर के पास पहुंचा और उसे मेमने के बारे में बताया. लेकिन शेर का कुछ देर पहले ही मेमने से सामना हो चूका था, उसने जाने से साफ़ मना कर दिया. सियार बोला, महाराज आप उस मेमने से बेवजह ही डर रहे है. वह बस एक बकरी का बच्चा है.
और आपको पता है बकरी के बच्चे का मांस कितना स्वादिष्ट होता है, सियार ने शेर को लालच देने की कोशिश की. फिर भी शेर तैयार नहीं हुआ. सियार ने फिर बोलना शुरू किया, महाराज आपको मुझपर भरोसा नहीं है. चलिए ऐसा करते है, आप अपनी पिछली टांग मेरे आगे वाले टांग से बांध दीजिये और दोनों साथ में चलकर उस मेमने का शिकार करते है.
केसरी लगभग जंगल के किनारे पहुंचने ही वाला था. अचानक से उसने देखा, शेर और सियार रास्ते के बीच में खड़े है. वह किमकर्तब्यविमूढ़ सा देखता रहा. तभी उसके दिमाग में एक विचार कौंधा. उसने सियार से बोला, “साला सियार, तुम दो शेर का बयाना लेकर गए थे और सिर्फ एक को लेकर आये हो. चलो कोई बात नहीं, आज एक शेर से ही काम चला लेंगे.” शेर को केसरी की बात सुनकर जोर का झटका लगा. वो बिना देर किये वहां से उल्टे पांव भागा. सियार उसे रोकता रहा, विनती करता रहा, लेकिन शेर ने उसकी एक न सुनी. सियार का शेर के साथ घिसटते घिसटते प्राण पखेरू उड़ गए.
केसरी भी बिना रुके सरपट जंगल से बाहर की तरफ भागा. वह तब तक भागता रहा, जब तक वह गाँव नहीं पहुँच गया. उसने अब राहत की सांस ली, लेकिन प्रण किया कि वो आगे से जंगल की ओर कभी नहीं जायेगा. वह हरिया के घर के अंदर बने बगीचे में दाखिल हुआ. सारी बकरियां वहां आराम से बिना डरे घास खा रही थी. केसरी भी उनके साथ घास खाने लगा.
साभार : दादाजी की जुबानी सुनी कहानियां
