क्योंकि सच ही है सपनो तक पहुँचने का एक रास्ता.

सोचा था एक सपनों का जहाँ बनाऊंगा,

लेकिन बनने से पहले ही सपना टूट गया,

हकीकत फिर से सामने था, कुछ बेजान सा,

रूठा हुआ सा, कुछ हठी और न मानने वाला,

शायद दुनियां ने जो दिखाया है, वो तुमने अभी सीखा नही,

सपने तो अपने है लेकिन सपनो को सच करना सबकी नहीं 

सच ही है सपनो तक का रास्ता, जो हमने कभी माना नहीं

सुना था सपने सच उसी के होतें है जिसने सपने देंखे है,

ये भी सुन हर सपना टूट जायेगा जिसके लिए तुम लड़े नहीं,


एक कहानी सुनाता हु, शायद हमने तुमने सबने सुनी है ,

राम थे अयोध्या के राजा, खुद अपना घर नहीं बचा पाए,

लंकापति से लड़े बहुत, लेकिन खुद से जीत ना पाए,

रावण और उस धोबी में फर्क क्या था,

कुछ गैरो ने छिना और कुछ अपनों ने,

कुछ ने ताकत लगाया और कुछने प्यार जताया,

सपने तो सबने देखे है पर सच को बदल न पाओगे,

रास्ता चुनो सच का ही, एक सन्देश कभी ना तुम भुलाओगे,

सपनो के लिए लड़ना होगा गैरो से और अपनों से भी,

क्योंकि सच ही है सपनो तक पहुँचने का एक रास्ता.

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Mukesh Prasad

दोस्तों, मेरा नाम मुकेश प्रसाद है। पेशे से मै एक बैंकर हूँ। मेरी हिंदी लेखनी में हमेशा से रूचि रही है खासकर कहानी, कविता और निबंध लेखन में। मेरी कोशिश होती है मै अपनी लेखनी से एक अच्छा मनोरंजक विषय उपलब्ध करा सकू। अगर आपको मेरी ये लेखनी पसंद आयी हो तो आप इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करें।

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