आज़ादी का अमृत महोत्सव
भारत को आज़ाद हुए ७५ साल बीत गए। आज भारत खुद पर गर्व महसूस कर रहा है। हो भी क्यों ना, कई सौ साल की गुलामी को वह पीछे छोड़ चूका है। आज का भारत विकसित देशों के साथ कन्धा से कन्धा मिलाकर चलने की हैसियत रखता है। आज का भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। आज का भारत सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दुनिया का सिरमौर है। आज दुनिया भारत को विकास का इंजन मानती है।
लेकिन ये सबकुछ यूँ ही नहीं मिल गया। आज हम जो भी है, वह उन शहीदों की बदौलत है जिन्होंने वतन के लिए खुद को कुर्बान कर दिया। उनके पीछे भी उनका परिवार था। लेकिन इन सबसे ऊपर उठकर उन शहीदों ने अपने देश को चुना। वे सही मायनो में दूरदृष्टा थे। वे जानते थे गुलामी के इन बेड़ियों तो तोडना ज्यादा जरुरी है। वे करोडो भारतवासियों को आज़ादी का हसीन तोहफा दे गए है।
पूरा भारत वर्ष आज़ादी के ७५ साल पुरे होने पर आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। दरअसल अमृत महोत्सव का ऐलान १२ मार्च २०२१ को प्रधान मंत्री के द्वारा साबरमती आश्रम से किया गया था। इसके उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश को सम्बोधित करते हुए कहा था “आज़ादी के आंदोलन के इतिहास की तरह ही आज़ादी के बाद के ७५ वर्ष की यात्रा, सामान्य भारतीयों के परिश्रम, इनोवेशन, उद्यमशीलता का प्रतिबिम्ब है।
हम भारतीय चाहे देश में रह रहे हों या विदेश में, हमने अपनी मेहनत से खुद को साबित किया है। हमें गर्व है हमारे संविधान पर । हमें गर्व है हमारी लोकतान्त्रिक परम्पराओं पर। लोकतंत्र की जननी भारत, आज भी लोकतंत्र को मजबूती देते हुए आगे बढ़ रहा है। ज्ञान-विज्ञानं से समृद्ध भारत, आज मंगल से लेकर चन्द्रमा तक अपनी छाप छोड़ रहा है।”
आज़ादी का अमृत महोत्सव यानि आज़ादी की ऊर्जा का अमृत, आज़ादी का अमृत महोत्सव यानि- स्वाधीनता सेनानियों से प्रेरणाओं का अमृत। आज़ादी का अमृत महोत्सव यानि – नए विचारों का अमृत। नए संकल्पो का अमृत। आज़ादी का अमृत महोत्सव यानि – आत्मनिर्भरता का अमृत और इसलिए ये महोत्सव राष्ट्र के जागरण का महोत्सव है। ये महोत्सव सुराज्य के सपने को पूरा करने का महोत्सव है। ये महोत्सव वैश्विक शांति का, विकास का महोत्सव है।
आज़ादी के इस अमृत महोत्सव की थीम “फ्रीडम स्ट्रगल (देश के गुमनाम नायको को याद करना है।” और इसका मुख्य उद्देश्य भारत की आज़ादी के ७५ वर्ष पुरे होने और यहाँ के लोगों, संस्कृति और उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास को याद करने और जश्न मनाने का है। यह महोत्सव भारत की जनता को समर्पित है जिन्होंने ने भारत को उसकी विकास यात्रा में आगे लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और भारत को आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए प्रयासरत है। इस महोतसव की शुरुआत १२ मार्च २०२१ से हुई है और यह १५ अगस्त २०२३ को समाप्त होगी।
आज़ादी का अमृत महोत्सव का मुख्य विषय है –
१. इसके अंतर्गत इतिहास में मील के पत्थर गुमनाम नायकों आदि को याद करना है।
२. विचार @७५ – वे विचार और आदर्श जिन्होंने भारत को आकार दिया एवं आने वाले समय में हमारा मार्गदर्शन करेंगे।
३. समाधान @७५ – इसमें विशेष उद्देश्य एवं लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्धताओं को मजबूत करना है। एवं २०४७ की यात्रा के लिए हम में से प्रत्येक को जागृत होना होगा और व्यक्तियों, समूहों, नागरिक समाज, शासन की संस्थाओ आदि के रूप में अपनी भूमिका निभानी होगी।
४. कार्य @७५ – इसके अंतर्गत नीतियों को लागु करने और प्रतिबद्धताओं को साकार करने के लिए उठाये जा रहे कदमो पर प्रकाश डालना है। कोविद महामारी के बाद दुनिया में उभर रही नई विश्व व्यवस्था में सही स्थान दिलाने में मददगार नीतियों को लागु करना है।
५. उपलब्धियां @७५ – इसके अंतर्गत भारत के ५००० साल पुराने इतिहास के साथ आज़ादी के ७५ वर्ष में विभिन्न क्षेत्रो में विकास और प्रगति का प्रदर्शन करना है।
वर्ष भर चलने वाले आज़ादी के अमृत महोत्सव में विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का आयोजन किया जाना है। जैसे –
१. हैदराबाद मुक्ति दिवस
२. ग्लोबल समिट २०२२ (१० से १४ सितम्बर २०२२)
३. बढे चलो (५ से १२ अगस्त २०२२) फ़्लैश डांस एक्टिविटी – युवाओं को जोड़ने के लिए
४. हर घर तिरंगा (१२ से १५ अगस्त)
५. भारत छोडो आंदोलन के ८०वीं वर्षगांठ
६. रेमेम्बेरिंग पार्टीशन (बंटवारें को याद करना – १४ अगस्त २०२२)
७. १८५७ की महाक्रांति की चित्र प्रदर्शनी एवं विशेष व्याख्यान
८. आज़ादी की रेलगाड़ी और स्टेशन (२२ जुलाई २०२२)
९. संकल्प से सिद्धि कांफ्रेंस (८ जुलाई २०२२)
१०. भारत तीर्थ -II (भारतीय ज्ञान पद्धति पर अंतराष्ट्रीय कांफ्रेंस)
इस महोत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जा रहा है। जैसे –
१. देश के नाम एक रंगोली सजाओ
२. देशभक्ति गीत प्रतियोगिता
३. लोरी प्रतियोगिता (थीम है – आधुनिक भारत के विचार)
तो आइये हम सब शामिल हो जाते है भारत के आज़ादी के इस अमृत महोत्सव मे ! जय भारत !
**सन्दर्भ : amritmahotsav.nic.in