हंसने वाला शेर

रामदीन पहाड़ो में बकरियां चराने जाता है। इन पहाड़ो में हरी घास और पेड़ पौधे आसानी से मिल जाते है। इनकी हरी और ताजी पत्तियां खाकर बकरियां जल्दी हष्टपुष्ट होती है। और इन्ही बकरियों को बेचकर रामदीन की रोजी रोटी चल रही है। 

पहाड़ो से रामदीन का गाँव दूर है फिर भी रामदीन को अपनी बकरियां कही और ले जाने से ज्यादा पहाड़ो में लाना पसंद है। वैसे तो जंगल में जंगली जानवरों से भी खतरा होता है। लेकिन इस जंगल में शेर या खतरनाक जानवर कभी दिखे नहीं। हाँ इधर हफ्ते भर से लोगो की जुबानी सुन रहा था की उन्होंने इस जंगल में एक शेर को घूमते देखा है। रामदीन ने इसे अफवाह ही माना और जंगल में बकरियों को ले जाना जारी रखा। 

एक दिन की बात है, रामदीन बकरियों के झुंड के साथ जंगल में चला जा रहा था। तभी अचानक से एक शेर रामदीन के सामने आकर खड़ा हो गया। रामदीन की सिट्टी पिट्टी गुम हो गयी। बकरियां भी शेर को देखकर उल्टे पैर  भाग खड़ी हुई। रामदीन मदद के लिए जोर जोर से आवाज़ लगाने लगा और भागकर एक पेड़ पर चढ़ गया। शेर शांत रहा, वो चुपचाप रामदीन को देखे जा रहा था। रामदीन को थोड़ा अजीब लगा। उसने तो यही सुना था की शेर बहुत फुर्तीले और खतरनाक होते है। 

रामदीन काफी देर तक पेड़ पर बैठा रहा। शेर भी पेड़ के नीचे चुपचाप बैठा था। रामदीन पेड़ पर थोड़ा नीचे आया। वो देखना चाहता था, शेर कहीं अँधा तो नहीं हो गया है ? उसने आवाज़ लगा कर शेर को उकसाने की कोशिश की। शेर जबाब में हंसने लगा। रामदीन ने कभी हंसने वाला शेर नहीं देखा था। वह पेड़ से नीचे उतर आया। 

शेर ने रामदीन को देखकर पूछा, रामदीन कैसे हो ? रामदीन ने शांत होते हुए जबाब दिया, मै ठीक हूँ। शेर ने बोलना शुरू किया, तुम बेकार में ही मुझसे डर रहे थे। चलो आओ, मै तुम्हे आज जंगल की सैर करता हूँ। रामदीन वापस गांव लौटना चाहता था, उसने मना कर दिया। शेर फिर से हंसने लगा, कहने लगा, “माना मै जंगल का लीडर हूँ, हर तरफ मेरा आतंक है, और इसी कारण से जंगल के सभी जानवर मुझे सलाम ठोकते है। लेकिन अब दुनिया बदल रही है। तुम अब इंसानो के लीडर को ही ले लो। पहले वो भी मेरी तरह खतरनाक होते थे। हर तरफ वो अपना आतंक फैलाते रहते थे। लेकिन अब वो हर किसी को प्रणाम करते है, बुजुर्गों के पैर पड़ते है। अब वो हर किसी से मित्रवत पेश आते है।” 

अब रामदीन इंकार नहीं कर सका, वो शेर के साथ चल पड़ा। शेर जंगल के अंदर जा रहा था। रामदीन कभी इस तरफ नहीं गया था। वो सिर्फ जंगल के बाहरी हिस्से तक ही आता था। शेर ने अपने चेहरे पर हंसी बिखेरते हुए बोला, रामदीन तुम अब हमारे दोस्त हो, हमारे जंगल किंगडम का मजा बिना किसी डर के उठा सकते हो। जंगल अब सघन हो गया था। ऊँची नीची पहाड़ियां थी, झरने थे, चारों तरफ हरियाली थी।  शेर ने फिर बोलना शुरू किया, सोचो अगर तुम्हारी बकरियां यहाँ आकर ये पौष्टिक घास और चारा खाएंगी, झरने से पानी पियेंगी, तो वो कितनी जल्दी हष्ट पुष्ट हो जाएंगी। तुम उनको बेचकर ज्यादा पैसा कमा सकते हो। रामदीन ने शेर को बीच में ही टोकते हुए पूछा, इन सबसे आपको क्या फायदा होगा ? “मैंने कहा न, मै आज का लीडर हूँ, मै सबकुछ अकेले ही हड़प नहीं करता। मै अपने दोस्तों को उनका हिस्सा भी देता हूँ। मेरे पास पूरा जंगल है, आओ हमदोनो मिलकर इसका फायदा उठाते है।” 

रामदीन थोड़ी देर इधर उधर घूमता रहा।  फिर शेर के पास जाकर बोला, अच्छा मै जाता हूँ। शेर ने पूछा, कल से तुम अपनी बकरियों को लेकर इधर आ रहे हो ? तुम्हारी बकरियों  को मै पूरी सुरक्षा दूंगा, एक का भी कोई बाल बांका नहीं कर सकता। रामदीन ने “हाँ” में सर हिलाया। शेर ने फिर बोलते हुए कहा, भाभी जी जो आज मालपुए बनाने वाली है, उसमे से मेरे लिए भी कुछ कल लेकर आना। रामदीन शेर की बात सुनकर चौक गया। सोचने लगा मेरे घर की बात इस तक कैसे आई ? शेर हंसने लगा, और बोला, “कहा न भाई, मै आज का लीडर हूँ, सब पर नजर रहती है मेरी।”

रामदीन गांव की तरफ लौट पड़ा।  उसके मन में बहुत सारे सवाल थे लेकिन उसने ज्यादा टेंशन ना लेना ही ठीक समझा, और शेर की दोस्ती को स्वीकार कर लिया। घर पहुंचा तो देखा, बाड़े में सारी बकरियां पहले ही आ चुकी है। उसने राहत की साँस ली। 

अब हर दिन रामदीन अपनी बकरियों के साथ जंगल के अंदर जाने लगा। बकरियां पौष्टिक घास खाकर तेजी से हट्टी कट्टी हो रही थी। शेर भी बकरियों के पास ही रहता था। शेर के डर से दूसरे जंगली जानवर उधर नहीं आते। रामदीन खुश था। रामदीन हर दिन घर में बनी पकवान साथ ले आता। शेर उसे बाड़े चाव से खाता। एक दिन शेर ने रामदीन से बोला, तुम हर दिन अपनी बकरियों को गांव ले जाते हो और कल फिर वापस लाते हो। कई बकरियां तो जंगली खाई में गिरकर मर जातीं है। तुम इनसब को मेरी गुफा में ही, क्यों नहीं रख देते? मेरी बड़ी सी गुफा है, उसमे तुम्हारी सारी बकरियां बड़े आराम से रह सकती है। अबतक शेर के व्यवहार ने रामदीन का दिल जीत लिया था। वो इंकार नहीं कर सका। शाम के वक्त वो सारी बकरियों को वो शेर की गुफा में ले गया। उसने देखा, शेर की गुफा सचमुच बड़ी है। दो तरफ से उससे निकले के रास्ते हैं।

शेर ने कहा, बकरियों को अंदर रख के एक रास्ते को तुम बड़े पत्थर से  बंद कर दो ताकि बकरियां बाहर नहीं निकल सके। और दूसरे दरवाजे पर तो मै रहूँगा हीं। रामदीन ने वैसा ही किया। रामदीन अब जाने को हुआ। शेर ने उसे रोकते हुए कहा, घर थोड़ी देर बाद जाना।  मैंने तुमसे मिलने के लिए अपने कई शेर दोस्तों को बुलाया है। आ जाओ, सब मिलकर पार्टी करते है। 

रामदीन थोड़ा झिझकते हुए अंदर पहुंचा। बहुत सारे खतरनाक दिखने वाले शेर एक साथ जमा हुए थे। रामदीन समझ नहीं पाया, ये सब क्या हो रहा है ? शेर रामदीन को भांप गया। वह फिर हंसने लगा। उसने रामदीन से बोलना शुरू किया, “तुमने अपने नेताओं को तो देखा ही है, मीडिया ने कैसे उसे घेर के रखा हुआ है। उन्हें अपनी “इमेज” अच्छी रखनी है तो शांत रहना होगा, हर किसी को सलाम करना होगा, जो वो बिलकुल पसंद नहीं करते। यहाँ मुझे भी अपनी “इमेज” से बाहर निकलना है।  आतंकी शेर से लोकप्रिय शेर बनना है। लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि मैंने अपना पेशा बदल दिया है।”

शेर ने बोलना जारी रखा, मैंने आज सब शेरो को इसीलिए बुलाया है ताकि सबको एक बेहतरीन डिनर दे सकूँ। अब तुम्ही बताओ, “क्या मैंने तुम्हे और तुम्हारी बकरियों को यहाँ तक लाने में किसी आतंक का सहारा लिया ? नहीं, बिल्कुल नहीं। हाँ, मैंने तुम्हे थोड़ा लालच दिया कि तुम्हारी बकरियां जल्दी हट्टी कट्टी होगीं और सुरक्षित रहेंगी। साला, ये लालच जब तक रहेगा, अपना “धंधा” चलता रहेगा। ” 

आज की शेरो की पार्टी में सबसे पहले रामदीन का इंसानी गोश्त पेश किया गया है। आगे तो बकरियों की लाइन लगी है। अब तो सारे शेर हंस रहे है। 

Oh hi there 👋
It’s nice to meet you.

Sign up to receive awesome content in your inbox, every month.

We don’t spam! Read our privacy policy for more info.

Unknown's avatar

Mukesh Prasad

दोस्तों, मेरा नाम मुकेश प्रसाद है। पेशे से मै एक बैंकर हूँ। मेरी हिंदी लेखनी में हमेशा से रूचि रही है खासकर कहानी, कविता और निबंध लेखन में। मेरी कोशिश होती है मै अपनी लेखनी से एक अच्छा मनोरंजक विषय उपलब्ध करा सकू। अगर आपको मेरी ये लेखनी पसंद आयी हो तो आप इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करें।

You may also like...

Leave a Reply

Discover more from सतरंगी हिंदी

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading