डिजिटल बैंक : बैंकिंग का एक नया युग

डिजिटल बैंक 

डिजिटल बैंकएक ऐसा बैंक होगा, जो बैंकिंग नियमावली एक्ट, 1949 (RB Act.) से संचालित होगा. डिजिटल बैंक जमा स्वीकार करेंगे, ऋण वितरित करेंगे, और वो सारे काम कर सकेंगे, जो एक शेडूल कमर्शियल बैंक्स करते है. लेकिन जैसा नाम से स्पष्ट है, डिजिटल बैंक इंटरनेट, मोबाइल और दूसरे चैनल पर उपलब्ध होंगे. इसका कोई आउटलेट या ब्रांच नहीं होगा. बैंक होने के कारण इसके विवेकपूर्ण और तरलता मानदंड (Prudential and Liquidity norms) किसी दूसरे कमर्शियल बैंक के सामान ही होंगे.

हाल में ही शुरू किये गए ७५ डिजिटल बैंकिंग यूनिट से यह पूरी तरह अलग है. हालाँकि दोनों के नाम में काफी समानता है. डिजिटल बैंक निम्नलिखित मामलो में डिजिटल बैंकिंग यूनिट से अलग है –

१. डिजिटल बैंकिंग यूनिट एक अलग बैंक नहीं है, जिसकी कोई अलग बैलेंस शीट होगी. यह कार्यरत बैंक का एक आउटलेट या शाखा है, जो डिजिटल माध्यम से बैंकिंग प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराएगा जबकि डिजिटल बैंक BR Act के तहत लाइसेंस प्राप्त एक बैंक होगा, जिसकी खुद की बैलेंस शीट होगी.

२. कोई कमर्शियल बैंक ही डिजिटल बैंकिंग यूनिट स्थापित कर सकता है जबकि डिजिटल बैंक एक लाइसेंस प्राप्त स्वतंत्र निकाय होंगे जो बैंकिंग कम्पटीशन एवं इनोवेशन को एक नया आयाम देंगे. 

प्रस्तावित डिजिटल बैंक कई और नामो से जाने जाते रहे है जैसे – चैलेंजर बैंक, नव बैंक. नव बैंक बिज़नेस मॉडल की शुरुआत दुनिया भर में आई आर्थिक मंदी के बाद कार्यरत बैंक पर लोगो का भरोसा कम होने के बाद हुई. यह 2015 के बाद ब्रिटैन जैसे बाज़ारों में दिखा और वही फला फुला.
कार्यरत कमर्शियल बैंक अभी भी अप्रभावी बिज़नेस मॉडल को अपना रहे है. जहाँ पर उच्च लागत लेकिन आय निम्न है, और जहाँ नए कस्टमर को जोड़ने की लागत ज्यादा है. ऐसे में नव बैंक/ फिनटेक डिजिटल चैनल को अपनाकर निम्न लागत में उच्च आय कर रहे है.

2. नव बैंक/ फिनटेक इन तीन बिज़नेस मॉडल को अपना रहे है –

१. नव बैंक (Front End Only)

इसमें वो कार्यरत बैंको के साथ मिलकर बैंक डिपाजिट एवं बैंक लोन को डिजिटल माध्यमों से लोगो तक पहुंचा रहे है. Open Technologies, RazorPayX, Dave इसके कुछ उदाहरण है.

२. डिजिटल बैंक (Full stack- Licensed)

इसमें डिजिटल बैंक बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त कर कार्यरत बैंक के समान ही डिपाजिट एवं लोन को डिजिटली लोगो तक पहुंचा रहे है. इनका खुद का बैलेंस शीट होता है. Starling, Webank, Kakao, Monzo, N26 इसके कुछ उदाहरण है.

३. कार्यरत बैंक की एक यूनिट (Autonomous Unit)

इसमें नव बैंक कार्यरत बैंक की एक यूनिट की तरह काम करती है. यह स्वतंत्र रूप से कार्य करते हुए नव बैंक और फिनटेक के साथ बैंकिंग दौड़ में शामिल है. (Marcus (Goldman Sachs) 811 (Kotak Mahindra Bank), and Yono (State Bank of India) इसके कुछ उदाहरण है.

3. डिजिटल बैंक (Full stack- Licensed)

भारत में डिजिटल बैंक के विकास को तीन चरणों में बांटा गया है.

चरण-1 

पहले चरण में सिमित डिजिटल बिज़नेस बैंक लाइसेंस (Restricted Digital Business Bank) और सिमित डिजिटल कंस्यूमर बैंक (Restricted Digital Consumer Bank) लाइसेंस दिए जायेंगे . इसमें न्यूनतम पूंजी(Minimum Capital), डिपाजिट साइज कैप (Deposit size cap) शामिल होंगे. गैर वित्तीय बैंक के कार्य भी डिजिटल बैंक के अन्य मुख्य कार्य में शामिल होंगे. केंद्रीय सरकार RBI की सलाह से गैर वित्तीय बैंक को भी डिजिटल बिज़नेस बैंक या डिजिटल कंस्यूमर बैंक का लाइसेंस दे सकती है. 

चरण-2  

दूसरे चरण में जिनको डिजिटल बिज़नेस बैंक या डिजिटल कंस्यूमर बैंक का लाइसेंस मिला है, वो रेगुलेटरी सैंडबॉक्स (Regulatory Sandbox) में रहकर अपने ऑपरेशन को शुरू कर सकते है. इस चरण में उन्हें बिज़नेस में कुछ रियायतें दी जायेगी. इसमें RBI कुछ चिन्हित विभागों के डाटा का संकलन करेगी, जैसे – कस्टमर को जोड़ने की लागत, MSME को दिए गए लोन की वॉल्यूम एवं वैल्यू, टेक्नोलॉजिकल विकास और तैयारी, लाइसेंस की शर्तो का अनुपालन.

चरण-3 

रेगुलेटरी सैंडबॉक्स में अच्छे प्रदर्शन करने वाले को पूर्ण डिजिटल बिज़नेस बैंक या डिजिटल कंस्यूमर बैंक का लाइसेंस दिया जायेगा. 

4. डिजिटल बिज़नेस बैंक और डिजिटल कंस्यूमर बैंक के लिए शर्ते :

1. न्यूनतम प्रदत पूंजी (Minimum Paid up Capital) 

RBI को न्यूनतम प्रदत पूंजी (Minimum Paid up Capital) तय करने का अधिकार होगा. सिमित डिजिटल बिज़नेस बैंक (Restricted Digital Business Bank) को लगभग २० करोड़ न्यूनतम प्रदत पूंजी रखना होगा. जबकि सिमित डिजिटल बिज़नेस बैंक से पूर्ण डिजिटल बिज़नेस बैंक बनने पर उन्हें २०० करोड़ न्यूनतम प्रदत पूंजी रखना होगा. सिमित डिजिटल कंस्यूमर बैंक (Restricted Digital Consumer Bank) को भी उपरोक्त सीमा तक न्यूनतम प्रदत पूंजी रखनी होगी. आखिरी निर्णय RBI विभिन्न पहलुओं जैसे- अनुमानित बैंक आकार, व्यवसाय योजना में उधारकर्ता का जोखिम प्रोफाइल आदि देखते हुए तय करेगी.

2. ट्रैक रिकॉर्ड 

ऐसे आवेदक को वरीयता दी जाएगी, जिसके पास ईकॉमर्स, पेमेंट, टेक्नोलॉजी (क्लाउड कंप्यूटिंग) का अनुभव होगा. नव बैंक/ फिनटेक जो स्माल फाइनेंस बैंक में उन्नत होना चाहते है या वैसे कार्यरत कमर्शियल बैंक जो पूर्ण डिजिटल बैंक स्थापित करना चाहते है, उनको भी इसमें शामिल किया जायेगा.

3. आधारभूत संरचनाओं तक कार्यरत कमर्शियल बैंक के बराबर की पहुँच

क. आधार EKYC/ क्रेडिट सूचना कंपनियांख. UPI/ IMPS/ Central Payment System (NEFT/RTGS)ग. ATM Schemesघ. डिपाजिट इन्शुरन्स एन्ड क्रेडिट गारंटी कारपोरेशन (DICGC)ड़. AA ecosystem

4. प्रुडेंशियल/तरलता जोखिम विनियमन

यह डिजिटल बिज़नेस बैंक और डिजिटल कंस्यूमर बैंक के लिए एक ही होगा जो कार्यरत कमर्शियल बैंक के बराबर होगा.

5. तकनीकी जोखिम विनियमन

डिजिटल बैंक को कमर्शियल बैंक की तुलना में इसका ज्यादा खतरा रहेगा. इसकारण पूर्ण डिजिटल बिज़नेस बैंक एवं पूर्ण डिजिटल कंस्यूमर बैंक के लिए तकनिकी तैयारी (Technological Preparedness) और कारोबार निरंतरता योजना (Business continuity Plan) की शर्तो को पूरा करना होगा.

6. समय समय पर जारी RBI की शर्तों को भी पूरा करना होगा.

7. तकनीकी तटस्थता (Technological Neutrality)

8. डिजिटल बिज़नेस बैंक के मुख्य प्रोडक्ट होंगे

क. MSME को लोन्स/ क्रेडिट कार्ड्स ख. करंट अकाउंट सर्विसेज/ बिज़नेस बैंकिंग सर्विसेज/ टाइम डिपाजिट (रिटेल कस्टमर) ग. फैक्टरिंग/ डिस्ट्रीब्यूशन (चैनल पार्टनर) घ. अन्य कार्य जो सेक्शन 6 BR Act में हो.

9. डिजिटल कंस्यूमर बैंक के मुख्य प्रोडक्ट होंगे

क. टर्म लोन/ क्रेडिट कार्ड्स ख. टाइम डिपाजिट (रिटेल कस्टमर)/ MSME बिज़नेस ग. उत्पाद और सेवाओं का वितरण

10. वैल्यू एडेड सर्विसेज – NBF के कार्य

11. प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority sector loan)

डिजिटल बिज़नेस बैंक इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए PSL सर्टिफिकेट्स , MSME लोन (Eligible under PSL) करेंगें. जबकि डिजिटल कंस्यूमर बैंक इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए SC/ST लोन, महिलाओं को पर्सनल लोन १ लाख तक, शिक्षा ऋण, विकलांग व्यक्ति को लोन आदि करेंगे.

निष्कर्ष :

भारत के सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से यूपीआई ने सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया है कि कैसे स्थापित बैंकों को चुनौती दी जा सकती है. यूपीआई लेनदेन मूल्य में ₹ 4 ट्रिलियन को पार कर गया है. आधार प्रमाणीकरण ₹ 55 ट्रिलियन को पार कर चुका है. अंत में, भारत अपने स्वयं के ओपन बैंकिंग ढांचे को चालू करने की दहलीज पर है।
ये सूचकांक प्रदर्शित करते हैं कि भारत के पास डीबी (डिजिटल बैंक) को पूरी तरह से सुविधा प्रदान करने के लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध है. भारत अब फिनटेक में वैश्विक नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने को तैयार है.**इस आर्टिकल की सामग्री  निति आयोग की डिजिटल बैंक रिपोर्ट से ली गयी है. निति आयोग की “डिजिटल बैंक” पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.

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Mukesh Prasad

दोस्तों, मेरा नाम मुकेश प्रसाद है। पेशे से मै एक बैंकर हूँ। मेरी हिंदी लेखनी में हमेशा से रूचि रही है खासकर कहानी, कविता और निबंध लेखन में। मेरी कोशिश होती है मै अपनी लेखनी से एक अच्छा मनोरंजक विषय उपलब्ध करा सकू। अगर आपको मेरी ये लेखनी पसंद आयी हो तो आप इसे अपने दोस्तों से जरूर शेयर करें।

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