क्या उस भगवान का है कहीं वास ?
मै ढूंढता फिर रहा था उसको
कभी पहाड़ो पर, कभी मंदिरों में
आंखे अभी भी सुनी थी, दिखा ना कोई
मेरे जेहन के अंदर से आवाज आई
क्या सचमुच वहाँ है भी कोई ?
हम जिसे अपना बना कर पूजते है
सुखों में धन धान्य से भेटते है
दुंखों में जिसे रखते है अपने पास
क्या उस भगवान का है कहीं वास ?
कभी गीता तो कभी रामायण में
कभी महात्मा तो कभी नारायण में
हर तरफ उम्मीद की एक किरण है
ऊपर वाला फिर आएगा जरूर।
आज अकेले में खुद को निहारा
ख्यालों ने आत्मा को उभारा
दिव्या रौशनी चमकी और
खुद को पुकारा, मै तो तेरे अंदर हूँ
अंश तो तू मेरा ही है।
मै हूँ तुझमे कभी, कभी सामने वाले में
मै जैसे हमेशा मुस्कुराता हूँ
मुसीबतो में भी नहीं घबराता हूँ
मदद को जब भी पुकारते हो
मै दौड़ा चला आता हूँ।
कहता हूँ, आज तुझसे अपनी बात
हंस मुस्कुरा अपनों को साथ लेकर
हाथ बटा उनका, जिंदगी सजा उनका
दुआएं जब मिलेगी तुझे, तब मै आऊंगा
अंदर रहूँगा तेरे, तुझमे ही बस जाऊंगा।